+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

विक्रम और बेताल

विक्रम तुम तो वर्तमान हो बल, विवेक, सामर्थ्य सभी कुछ मिला-जुलाकर आगत का सिंगार करो तुम ये क्या अपने कंधे पर तुम भूत लादकर घूम रहे हो क्या तुमको आभास नहीं है जब भी तुम उस प्रेतकाय के उलझे केशों से उलझे हो तब तब तुम अपने भविष्य को पीठ दिखाए खड़े रहे हो और कभी जब उसे...

बाड़ और अराजकता

कोई मनुष्य अपने भीतर चल रहे प्रत्येक भाव को अभिव्यक्त कर दे, तो समाज उसे तत्काल ‘पागल’ घोषित कर देगा। इच्छाएँ उस मदमस्त गजराज की तरह होती हैं कि उन पर लोकभय का अंकुश न लगाया जाए तो वे पूरा वनप्रदेश तहस-नहस कर सकती हैं। आजकल कुछ लोग अपने मन के भीतर की इन समस्त...

साहित्य और समाधान

अपराध करने जा रहे व्यक्ति को सबसे ज़्यादा डर अपने-आपसे लगता है। यही कारण है कि चोर, हत्यारे, जेबकतरे, झूठे, षड्यंत्रकारी, मिलावटखोर, रिश्वतखोर, बलात्कारी और अन्य प्रकार के अपराधी अपराध करने के लिए एकांत तलाशते हैं। यह एकांत अन्य किसी से नहीं, बल्कि स्वयं से चाहिए होता...

भीतर-बाहर

ख़ुश होते तो आँख चमकती मन हँसता तो देह दमकती डर लगता तो दिल की धड़कन ख़ुद चेहरे तक आन धमकती क्या होंठों के खिंच जाने को हम सचमुच मुस्कान कहेंगे क्या आँखों के मुंदने को ही जीवन का अवसान कहेंगे हाथ-पैर हिलते-डुलते हैं, पर मन में उत्साह नहीं है साँसें आती हैं, जाती हैं पर...

सनातन धर्म और सहिष्णुता

सनातन संस्कृति की सबसे ख़ूबसूरत बात यही है कि यहाँ भक्त और भगवान के मध्य जो बातचीत होती है, वह केवल भक्तिरस तक ही सीमित नहीं है। बल्कि उसमें काव्य के अन्य सभी रसों की सृष्टि सम्भव है। विश्व के अन्य किसी धर्म में यह चमत्कार सम्भव नहीं है। किसी अन्य धर्म के आराध्य की...
error: Content is protected !!