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अवतारी बालक

जीवन के जिस मौसम में आँखें सपने पाला करती हैं कुछ रंग-बिरंगी उम्मीदें जब होश संभाला करती हैं पलकों के भीतर कोई अनगढ़ मूरत ढाली जाती है सरगम साँसों की वीणा पर प्रियतम के गीत सुनाती है वो मौसम जिसमें अपने कुछ कानून बनाए जाते हैं वो मौसम जिसमें मिलन-विरह के नग़में गाए जाते...

तिरंगा

अपना तिरंगा एक परचम ही नहीं है भावनाओं की बहार-सी है तीन रंग में छोटे-छोटे बालकों के अधरों पे बिखरी जो वही एक पावन हँसी है तीन रंग में प्रेम, त्याग, एकता, अखण्डता, समानता से ओत-प्रोत आत्मा बसी है तीन रंग में खादी वाले मोटे रेशों का ही ताना-बाना नहीं भारत की एकता कसी...

स्वतन्त्रता

मन के मलंग मतवाले महानायकों की कुर्बानियों का परिणाम है स्वतन्त्रता स्वर की बुलन्दियों ने जो अदालतों में किया क्रान्ति का वो दिव्य यशगान है स्वतन्त्रता शहीदों ने भूख-प्यास सह के बचाया जिसे भारती का वही स्वाभिमान है स्वतन्त्रता लाल-बाल-पाल औ सुभाष जैसे ऋषियों की साधना...

वतन के नाम

अगर दुश्मन करे आग़ाज़, हम अंजाम लिख देंगे लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे हमारी ज़िंदगी पर तो वतन का नाम लिखा है अब अपनी मौत भी अपने वतन के नाम लिख देंगे ✍️ चिराग़...

सुभाषचंद बोस

जिनकी धमनियों में डोलता था ज्वालामुखी, मात-भारती के क्रांति-कोष कहाँ खो गए राष्ट्र-स्वाभिमान वाली मदिरा का पान कर होते थे जो लोग मदहोश; कहाँ खो गए जिस सिंह-गर्जना से बाजुएँ फड़कतीं थीं, इन्क़लाब वाले जय-घोष कहाँ खो गए देश को आज़ादी की अमोल सम्पदा थमा के, नेताजी सुभाषचन्द...
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