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शिव : साधना सहजता की

शिव… जहाँ पीड़ा और उत्स एकाकार हो जाते हैं। शिव… जहाँ काव्य के नौ रस बिना किसी भेदभाव के एक साथ रहते हैं। शिव… जहाँ सृष्टि के समस्त भावों को प्रश्रय मिल जाता है। शिव… जिसके द्वार किसी के लिए भी बंद नहीं हैं। बल्कि यूँ कहा जाए कि जहाँ द्वार जैसा...

जैन धर्म के अनुयायी

हम जैन धर्म के अनुयायी हम नियम निभाने वाले हैं श्रावक अणुव्रत के धारी हैं श्रमणों ने महाव्रत पाले हैं हम सिद्धशिला का लक्ष्य बना, अरिहंतों की पूजा करते आचार्य कथित पथ को तजकर, नहीं काम कोई दूजा करते पाठक परमेष्ठी से पढ़कर मुनि मार्ग को जाने वाले हैं हम जैन धर्म के...

प्रतिशोध का दंश

प्रतिशोध एक अंतहीन प्रक्रिया है। जाति, धर्म, सम्प्रदाय, खानदान, राजनीति, विचारधारा, देश, समाज… इन सबका सौंदर्य और सुख प्रतिशोध की इस महाज्वाला में भस्म हुआ जाता है। देवासुर संग्राम से लेकर रामायण, महाभारत और चाणक्य ही नहीं, वरन प्रत्येक संस्कृति और समाज के पास...

दूसरा आयाम

जो प्रतीक्षा आँख में शबरी बसाए जी रही है वह प्रतीक्षा राम के भी पाँव में निश्चित मिलेगी धूप जैसी जिस विकलता को सुदामा ने जिया है वह विकलता द्वारिका की छाँव में निश्चित मिलेगी जो महल तक आ गयी होगी युगों का न्याय लेने वह किसी वन में सिसकती इक शिला की आह होगी जो युगों...

हिरण्यकश्यप होने का नुक़सान

स्वयं को भगवान मानने की महत्वाकांक्षा में हिरण्यकश्यप ने होलिका के वरदान का दुरुपयोग किया। चिता ने चीख-चीख कर कहा कि, ‘मूर्ख हिरण्यकश्यप, जनता पर इतना अत्याचार न कर कि तेरे ही महल के खंभे तेरे विनाश का उद्गम बन जाएँ!’ मदान्ध राजा ने चिता की बात अनसुनी कर दी। फिर एक...
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