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सादगी की डगर

सत्य का पथ हमें क्यों जटिल सा लगा उम्र को झूठ में ढाल कर चल दिए सादगी की सुहानी डगर छोड़ कर ज़िन्दगानी फटेहाल कर चल दिए जो रवैया हमें पीर देता रहा क्यों उसी के लिए हम पुरस्कृत हुए ज़िन्दगी पर चढ़े पाप के आवरण पाठ जितने पढ़े सब तिरस्कृत हुए प्रश्न तो आत्मा ने उठाए मगर हम...

जग में कुछ लोग कमाए

काऊ ने भोग लिए मन के सुख, काऊ ने देह के रोग कमाए दौलत में सुख खोजने वालों ने केवल भौतिक भोग कमाए काऊ ने प्रेम में जीते नारायण, काऊ ने मात्र वियोग कमाए जीवन सिर्फ़ उन्होंने जिया, जिनने जग में कुछ लोग कमाए ✍️ चिराग़...

आपदा-प्रबंधन

संकट हो कोई समक्ष खड़ा या फिर घिर आए युद्ध बड़ा जीवन की हर कठिनाई से मानव का पुत्र सदैव लड़ा मानवता का इक दिव्य भाव, अंतस् में धारण कर लेंगे आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे सागर ने लांघी मर्यादा सूनामी यम का रूप बनी भूकम्पों की मनमानी से जब धरा मृत्यु का कूप...

इक नया रास्ता

ज़िन्दगी जब भी आज़माती है इक नया रास्ता दिखाती है न तो पिंजरे में चहचहाती है न ही अब पंख फड़फड़ाती है जब कभी माँ की याद आती है ये हवा लोरियाँ सुनाती है वो मरासिम को यूँ निभाती है मिरा हर काम भूल जाती है मेरे ख़्वाबों में यूँ वो आती है जैसे पाजेब छनछनाती है लफ़्ज़ मिल पाए तो...

रिस्क

मेरे भीतर दौड़ना चाहती है इक नदी दरदरे रेगिस्तान की ओर। मस्तिष्क ने कहा- “रिस्क है इसमें।” मन बोला- “जुआ ही तो है या तो लहलहा उठेगा रेगिस्तान या दरदरा जाएगी...
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