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सादगी

आधा मन लेकर विभीषण बनोगे
ज्यादा मन लेकर रावण बनोगे
सादा मन लेकर राम बन जाओगे
✍️ चिराग़ जैन

परिपक्व

परिपक्वता एक सिद्धि है जो थोड़े नैष्ठुर्य, थोड़ी कायरता और थोड़ी निर्लज्जता की साधना से प्राप्त होती है।
✍️ चिराग़ जैन

प्रवृत्ति

मिट्टी में
क्षमता होती
बीज की प्रवृत्ति बदलने की
तो
एक ही गुरुकुल में
एक ही गुरु से पढ़कर
सभी शिष्य युधिष्ठिर बन जातेे
कोई दुर्योधन न बना होता

✍️ चिराग़ जैन

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