+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

तू भी सब-सा निकला

जो जितना भी सच्चा निकला वो उतना ही तनहा निकला सुख के छोटे-से क़तरे में ग़म का पूरा दरिया निकला कुछ के वरक़ ज़रा महंगे थे माल सभी का हल्का निकला मैंने तुझको ख़ुद-सा समझा लेकिन तू भी सब-सा निकला कौन यहाँ कह पाया सब कुछ कम ही निकला जितना निकला ✍️ चिराग़...

तनहा रोते हैं

जीवन बीता घातों में प्रतिघातों में दौलत की शतरंजी चाल-बिसातों में दुनियादारी के ही वाद-विवादों में अब तनहा रोते हैं काली रातों में जिस धरती पर सम्बन्धों को उगना था हम उस पर दौलत की फसल लगा आए जिन आँखों में सीधे-सादे सपने थे उनको दौलत का अरमान थमा आए एक अदद इन्सान...
error: Content is protected !!