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तेरी दुश्मनी भी क़माल है

न जहाँ में तेरा जवाब है, न नज़र में तेरी मिसाल है तेरी दोस्ती भी क़माल थी, तेरी दुश्मनी भी क़माल है क्या हसीन खेल है ज़िन्दगी, कभी ग़मज़दा, कभी ख़ुशनुमा कभी एक उम्र का ग़म नहीं, कभी एक पल का मलाल है मेरी सोच बदली तो साथ ही, मेरी ज़िन्दगी भी बदल गई कभी मुझको उसका ख़याल था, कभी...

अंतर्मुखी

ख़ुशी की लाश उठती है ख़ुशी की चाह के नीचे बहुत से ज़ख्म होते हैं ज़रा-सी आह के नीचे हमारे दिल की बातें दिल में ऐसे दब के रहती हैं कि जैसे पीर सोता हो कोई दरगाह के नीचे ✍️ चिराग़...

संतोष

सिर्फ़ मकरन्द बन के जी लेंगे हम तेरी गन्ध बन के जी लेंगे ज़िन्दगी चाक़ हो गई तो क्या हम भी पैबन्द बन के जी लेंगे ✍️ चिराग़...

मर्यादा

न हों हदों में तो छाले रिसाव देते हैं किनारे धार को बाढब बहाव देते हैं हदों में हैं तो ख़ैर-ख्वाह हैं उंगलियों के हदों को लांघ के नाखून घाव देते हैं ✍️ चिराग़...

कोई कैसे सच बोले

जब तक हमसे भाग्य हमारे खोटे होकर मिलते हैं बस तब ही तक हम लोगों से छोटे होकर मिलते हैं कोई कैसे सच बोले सबकी है अपनी लाचारी अब तो दर्पण से भी लोग मुखोटे होकर मिलते हैं जिनसे मतलब हो बस उनकी हाँ को हाँ कहते हैं जो उनका क्या है; बिन पेंदी की लोटे होकर मिलते हैं जब से...
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