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उम्मीदों की राह चला हूँ

हर सन्नाटा मुखरित होगा, जब मैं स्वर लेकर पहुँचूँगा उम्मीदों की राह चला हूँ, मैं ख़ुशियों के घर पहुँचूँगा थक कर टूट नहीं सकता हूँ, मुझको श्रम का अर्थ पता है बढ़ने की इच्छा कर देगी, हर मुश्क़िल को व्यर्थ पता है मेरे हाथों की रेखाओं में इतनी कठिनाई क्यों है निश्चित मानो,...

खालीपन

जिस दरपन ने तुम्हें निहारा, उस दरपन का खालीपन और सघन कर देता है इस अंतर्मन का खालीपन कल तक आंगन में उनके आने की कोई आस तो थी अब तो भुतहा सा लगता है इस आंगन का खालीपन सारा कुछ खोकर भी जाने किसे जीतने निकला हूँ शायद मुझमें घर कर बैठा है रावन का खालीपन मेरा सब कुछ लेकर...

पाप

सिर्फ़ मतलब के लिए हर चाल चलना पाप है हर दफ़ा दर देखकर मजहब बदलना पाप है शाइरी, दीवानगी, नेकी, इबादत, मयक़शी और राहे-इश्क़ में गिर कर संभलना पाप है काश बच्चों की तरह हालात भी ये जान लें ख़्वाहिशों की तितलियों के पर मसलना पाप है दौर इक ऐसा भी था, जब झूठ कहना मौत था और अब...

लहर

ग़रीबों के बच्चों की भूखी आँखों में पलते कोरे स्वप्न अनायास ही मिट जाते हैं सागर-तट पर फैली रेत पर लिखे नाम की तरह। रेतीली चित्रकारी को मिटाने आयी लहर हर बार दे जाती है एक नया चित्र सागर के तट को ताकि व्यर्थ न हो यात्रा भविष्य में आनेवाली लहर की! ✍️ चिराग़...

ग़लतफ़हमी

एक लमहे के लिए सारी जवानी काट दी ठीकरों की चाह में इक फ़स्ल धानी काट दी इक न इक दिन कोई तो समझेगा हाले-दिल मिरा इस ग़लतफ़हमी पे सारी ज़िन्दगानी काट दी ✍️ चिराग़...
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