Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
बार-बार हारने के बाद भी आखिरकार
राहुल जी जीतने लगे हैं हर चाल में
उन्नीस में थोड़ा देख-भालकर फेंकियेगा
खुद ही न फँस जाओ जुमलों के जाल में
कांग्रेसियों को भी संभलकर चलना है
डूबने न लग जाओ, अगले उछाल में
गाय, गधे, घोड़े छोड़कर अब यह सोचो
ऊँट किस करवट बैठे नए साल में
✍️ चिराग़ जैन
Blank Verse, Chirag Jain Writings, Poetry, Unpublished
दो हज़ार अठारह बीता देकर कितने सारे घाव
कालखंड की चौसर पर ज्यों मौत जीतती जाए दांव
साल अभी प्रारम्भ हुआ था काल दिलों को छील गया
दूर देश में एक हादसा श्रीदेवी को लील गया
अभिनय के घर मातम छाया, इस ग़म की सिसकी थमती
उससे पहले विदा हो गए श्री जयेंद्र जी सरस्वती
अगला सदमा लगा अचानक सूफी की कव्वाली को
विदा किया हमने धरती से प्यारेलाल वडाली को
तभी काव्य की गलियों की ख़ुशियों को पाला मार गया
हिंदी कविता का इक ध्रुवतारा टूटा केदार गया
काल साथ ले चला अचानक शोलों के सहभागी को
काव्य जगत ने खोया अपने बालकवि बैरागी को
इसके बाद कारवां गुज़रा गीतों के जादूगर का
धरती का नीरज बन बैठा अमर सितारा अम्बर का
राजनीति की गलियाँ रोईं दक्षिण के स्वर क्लान्त हुए
चेन्नई की धरती के बेटे करुणानिधि जी शांत हुए
जाने क्या विधि ने ठानी थी, कैसी थी उसकी मर्ज़ी
पाँच दिनों के बाद बिछुड़ गए सोमनाथ जी चटर्जी
ऐसा लगता था ईश्वर ने सारे गौहर बीन लिए
जब निर्मम होकर भारत से अटल बिहारी छीन लिए
एक एक कर हमसे छीने कितने जगमग दीप गए
पत्रकारिता जी भर रोई जब नैयर कुलदीप गए
कड़वे प्रवचन मौन हो गए, ओझल हुआ अमिट आलोक
सारे संत जगत पर छाया संत तरुण सागर का शोक
फिर नारायण दत्त तिवारी, और खुराना लाल मदन
इतने सारे हीरे खोए, घायल है अब अंतर्मन
ये आँसू का साल रहा है अब कोई संघर्ष न हो
ईश्वर से बस यही दुआ है अगला वर्ष हर्ष का हो
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
इस कलाई को हथेली की छुअन भी दे बहन
हर दफ़ा डाक से राखी नहीं अच्छी लगती
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
हार भी है, जीत भी है
पीर भी है, प्रीत भी है
अनवरत इक शोर भी है
आपदा घनघोर भी है
किन्तु अन्तस् में अमर आह्लाद जीवित है
होलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है
मानता हूँ उत्सवों का दौर थोड़ा कम हुआ है
आंधियों से आम्रवन का बौर थोड़ा कम हुआ है
किन्तु कलरव ने चहकने की प्रथा त्यागी नहीं है
मांगलिक वेला अभी सब हार कर भागी नहीं है
कोयलों का आम से संवाद जीवित है
होलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है
दृष्टि की सीमा तलक अनजान वीराना पड़ा है
कान के उस पार सीमाहीन सन्नाटा खड़ा है
किन्तु हाथों पर तनिक रंगीन-सा एहसास भी है
‘पीर का भी अंत होगा’ -एक ये उल्लास भी है
मौन का आनंद अंतर्नाद जीवित है
होलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है
धीर टूटेगा लखन की चेतना को लुप्त पाकर
मन विकल होगा किसी अभिमन्यु को समिधा बनाकर
किन्तु द्रोणाचल किसी संजीवनी को जन्म देगा
शौर्य को अमरत्व युग-युग तक समूचा धर्म देगा
सत्य का यश मौत के भी बाद जीवित है
होलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
पूरी राजनीति हो गई मवाली,
सभी के सब जाली
हैं होली के रंग रसिया
एक-दूसरे को मार मार ताली,
सुनावें रोज़ गाली
ये ठीक नहीं ढंग रसिया
अभी चाय का शोर थमा था, तभी पकौड़ा आ पहुंचा
देसी गदहे नहीं चले तो, अरबी घोड़ा आ पहुंचा
नरसिम्हा से मुक्त हुए तो देवेगौड़ा आ पहुंचा
पहला पकड़ा नहीं गया था, नया भगौड़ा आ पहुंचा
जाने कैसी करी रे रखवाली,
थमा के उन्हें ताली
क्यों छान रहे भंग रसिया
पहले हमसे वोट, अनोखे स्वप्न दिखाकर छुड़वा ली
कांग्रेस की करतूतों का राग सुनाकर छुड़वा ली
भारत में रहकर दी राहत, बाहर जाकर छुड़वा ली
सब्सिडी भी ऊँची-ऊँची बात बनाकर छुड़वा ली
करी डीजल की टंकी भी खाली,
चिढ़ाने लगी थाली
ज़माना हुआ तंग रसिया
हाथ बांधकर घर बैठे हैं लालकृष्ण आडवाणी जी
अच्छे अच्छे मांग गए थे जिनके आगे पानी जी
बंद कर दिए नोट अचानक खूब करी मनमानी जी
सबको समझा दिया मिनिट में माया आनी जानी जी
सबने सड़कों पे लाइनें लगा ली,
मशीनें नोटों वाली
महीनों रहीं दंग रसिया
मंगलयान गया तो उसका पूरा क्रेडिट ले भागे
बुलेट ट्रेन को कर्जा लेने तुम दौड़े आगे-आगे
जिसने तुम पर प्रश्न उठाया उस पर ही गोले दागे
न्याय मीडिया तक आ पहुंचा बस उस रोज़ नहीं जागे
बेच खाई विरोधियों की गाली,
बिगड़ती संभाली
तू पूरा मलंग रसिया
सुखरामों की किस्मत खुल गई, मुफ़्ती से इंसाफ हुआ
नीतिश बाबू से झगड़े का ऊँचा पर्वत हाफ हुआ
अच्छा-बुरा चरित्र धुल गया, नीति-नियम का लाफ़ हुआ
जिसने बीजेपी जॉइन की उसका दामन साफ हुआ
आधी कांग्रेस खुद में मिला ली,
ये चाय वाली प्याली
हुई है बदरंग रसिया
योगी ने भगवा रंग डाला बाकी रंग निचोड़ दिया
अमित शाह ने हर प्रदेश में बीजेपी बम फोड़ दिया
नोट बंद कर जीएसटी से सब व्यापार झिंझोड़ दिया
जनता की पॉकेट पे तुमने अरुण जेटली छोड़ दिया
हाय कैसी ये चौकड़ी बना ली,
हुए हैं सब ठाली
मचाया हुड़दंग रसिया
✍️ चिराग़ जैन