+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

कुर्सी की खुमारी

सबने भर भर के अपनी पिचकारी, विरोधियों पे मारी होली का चढ़ा रंग भाइयो! कहीं लाठी बजी है कहीं गारी, कहीं कुर्सी की खुमारी सभी का न्यारा ढंग भाइयो! बच्चन जी ने खूब कहा था मेल कराती मधुशाला पर सत्ता का कैसा-कैसा खेल कराती मधुशाला शिक्षामंत्री जैसों को भी फेल कराती मधुशाला...

गणपति : एक जीवनशैली

गणेश… बुद्धि के अधिपति। गणेश… रिद्धि-सिद्धि के स्वामी। गणेश… शुभ-लाभ के पिता। गणेश… संतोषी के जनक। भारतीय पौराणिक साहित्य में गणेश अद्वितीय हैं। गणेश जी को लेकर जो प्रतीक विधान गढ़ा गया है वह लक्षणा नहीं, विलक्षण है। पाराशर ऋषि के आश्रम को...

पापा का जादू

न कोई ट्रिक है ना तकनीक पापा जादू से ही सब कुछ कर देते हैं ठीक दिन भर दुनिया भर के सब आघातों को सहते हैं रात ढले अपनी दुविधा बस अम्मा से कहते हैं इतने सीधे-सच्चे हैं हर छल से हिल जाते हैं जब अपने बच्चों से मिलते हैं तो खिल जाते हैं झट से ग़ायब हो जाती है चिंताओं की...

होली : एक अवसर

होली; मनुष्य को भीतर से बाहर तक एकरूप कर देने का त्योहार। होली; अलग-अलग रंगों के एकरंग हो जाने का अवसर। होली; शालीनता और नैतिकता के बोझ को किनारे रखकर कुछ क्षण स्वाभाविक हो जाने का पर्व। होली; सभ्यता के आडम्बर से मुक्त होकर सहजता की धारा में डुबकी लगाने का रिवाज़। होली...

रंग में भंग

होली के हुड़दंग में रंग में भंग पड़ गयी इधर ठण्डाई गले से नीचे उतरी उधर भांग सिर पर चढ़ गई भोले की बूटी ने ऐसा झुमाया कि हाथ को लात और सिर को पैर समझ बैठा चूहा भी ख़ुद को शेर समझ बैठा नशे की झोंक में लफड़ा बड़ा हो गया पत्नी के सामने तनकर खड़ा हो गया पत्नी ने आँखें दिखाई तो...
error: Content is protected !!