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मैं महज किरदार जीता हूँ

एक मैं, कितना झमेला विश्व मुझ जैसों का मेला इस समूची सृष्टि को जो साध लेता है अकेला बस उसी के खेल का विस्तार जीता हूँ मैं महज किरदार जीता हूँ मैं वही जिसने जनम के साथ इक परिवार पाया हार हो या जीत हो, परिवार सब स्वीकार पाया जब जहाँ जो भी मिला सब भोगकर जीता रहा हूँ...

उम्मीदों की राह चला हूँ

हर सन्नाटा मुखरित होगा, जब मैं स्वर लेकर पहुँचूँगा उम्मीदों की राह चला हूँ, मैं ख़ुशियों के घर पहुँचूँगा थक कर टूट नहीं सकता हूँ, मुझको श्रम का अर्थ पता है बढ़ने की इच्छा कर देगी, हर मुश्क़िल को व्यर्थ पता है मेरे हाथों की रेखाओं में इतनी कठिनाई क्यों है निश्चित मानो,...

इरादा

तेरे मन में भी इक इरादा है मेरे मन में भी इक इरादा है वक्त क़ी आंधियाँ बताएंगीं कौन मजबूत कितना ज्यादा है ✍️ चिराग़...

गुनाह

सज़ाओं में मैं रियायत का तलबदार नहीं क़ुसूरवार हूँ, कोई गुनाहगार नहीं मैं जानता हूँ कि मेरा क़ुसूर कितना है मुझे किसी के फ़ैसले का इन्तज़ार नहीं ✍️ चिराग़...

मुझे तुम भूल सकते थे

फ़ज़ाई रक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे तुम्हारा अक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे तुम्हारी चाह हूँ, आदत, इबादत हूँ, मुहब्बत हूँ महज इक शख़्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे ✍️ चिराग़...
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