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सावधान, आगे सड़क है!

भारत एक ऐसा देश है, जहाँ सड़कें बनाई नहीं जातीं। ऐसा लगता है मानो हर सड़क भारतीयों को संघर्षों से जूझने का प्रशिक्षण देने के लिए राहों में बिछ गई हो। देश की राजधानी से प्रारंभ करते हैं। इस शहर की सड़कों के दोनों ओर फुटपाथ बनाए गए हैं। फुटपाथ, अर्थात् रेहड़ी, पटरी लगाने का...

सिस्टम और हम

सिस्टम की आपसे केवल इतनी अपेक्षा है कि आप सिस्टम से कोई अपेक्षा न करें। जब कोविड से जूझना हो तो डॉक्टर को सिस्टम का सहयोग करना चाहिए। उस समय, न उसे अपने ड्यूटी ऑवर्स की चिंता करनी चाहिए, न अपनी जान की! ऐसा करते हुए उनकी जान चली जाये तो उनका जीवन सार्थक होगा। सिस्टम की...

विवेक को सोने दो

चेतावनी: यह पोस्ट आपको विवेकशील बना सकती है। और विवेकशील होना आपके राजनैतिक भविष्य के लिए घातक है। हम भयंकर संवेदनहीन लोगों से घिर चुके हैं। ‘अपराधी’; ‘विवश’; ‘दरिन्दा’ और ‘बेचारा’ जैसे उपनाम हमारी राजनैतिक प्रतिबद्धता को देखकर तय किए जाते हैं। भाजपाई होने के लिए...

स्वार्थी कायरता

हम सब बहुत तेज़ी से भीड़ में अकेले होते जा रहे हैं। एक सिंह सैंकड़ों हिरणों के बीच से एक हिरण को उठा लाता है, क्योंकि सिंह आश्वस्त होता है कि आक्रमण के समय झुण्ड का प्रत्येक हिरण एकाकी हो जाएगा। यदि झुण्ड के आठ-दस हिरण भी संगठित होकर सिंह पर धावा बोल दें तो कोई नाहर...

चीख और ठहाका

चुनाव आचार संहिता के अनुसार वोटिंग से कुछ घंटे पूर्व चुनाव क्षेत्र में चुनाव प्रचार पर रोक लग जाती है। यह नियम दशकों से यथावत है। इधर परिस्थितियाँ बदल गईं। तकनीक बदल गई। अब ठीक वोटिंग के समय टेलीविजन पर चुनावी रैली का प्रसारण होता है। लेकिन इससे चुनाव आचार संहिता का...

जनता की भूमिका

हमारे समाज की सबसे प्रभावी पाठशाला है सिनेमा। सिनेमा ने भारतीय समाज का निर्माण किया है। और समाज ही नहीं; सामाजिक चलन, प्रवृत्ति और यहाँ तक कि मानसिकता का भी निर्माण सिनेमा ने ही किया है। हमने सिनेमा से सीखा है कि आम जनता कीड़े-मकौड़े की तरह है, जिसकी न कोई इज़्ज़त है,...
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