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भारतीय राजनीति : एक निबंध

भारतीय राजनीति में दो पक्ष होते हैं। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे की दृष्टि में विपक्ष होते हैं। भारत की राजनीति एक सधे हुए नाटक की तरह है जिसकी बाकायदा एक पटकथा है। इस पटकथा में हर पक्ष के अलग-अलग संवाद हैं। पाँच साल में एक बार मतदान की पर्चियों से यह तय किया जाता है कि...

शुभकामनाओं की बाढ़

‘चार पैग व्हिस्की, दो बोतल बीयर, ओ माई डियर, हैप्पी न्यू ईयर’ -बचपन में ग्रीटिंग कार्ड पर इस गोत्र की शायरी लिखी जाती थीं। ‘आपकी सारी प्रॉब्लम होंगी फिक्स, ख़ुशी-ख़ुशी बीतेगा ट्वेंटी ट्वेंटी-सिक्स’; ‘नीचे से निकला आलू, 2026 चालू’ और ‘ऊपर से गिरा बम, 2025 ख़तम’ -इन...

अपने-अपने त्योहार, अपनी-अपनी गालियाँ

भारत की राजनीति में आजकल ऑफ बीट सेक्युलरिज्म का दौर चल रहा है। सबने अपने-अपने महापुरुषों और अपने-अपने त्योहारों का कॉपीराइट करा लिया है। इसलिए जब भी कोई त्योहार आता है तो हर खेमे के लोग अपने-अपने कलैंडर खोलकर बैठ जाते हैं और उसके जवाब में अपने किसी महापुरुष की कोई...

सड़क सौन्दर्य

देश की यातायात व्यवस्था देखकर मेरा मन श्रद्धा से भर जाता है। पूरी दुनिया सड़कों के रास्ते दफ्तर पहुँचती है और दफ्तर पहुँचकर चुनौतियों से जूझने लगती है। हम भारतीय चुनौतियों से जूझते हुए दफ्तर पहुँचते हैं और दफ्तर पहुँचकर चैन की साँस लेने लगते हैं। अन्य देशों के लोग...

रुपया क्यों लुढ़कता है

जो लोग रुपये के गिरने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, उन्हें मैं साफ़-साफ़ बता देना चाहता हूँ कि रुपया सरकार के कारण नहीं, तुम्हारी फटी हुई जेब के कारण गिरता है। यदि तुमने अपनी जेब सिल ली होती तो रुपया नहीं गिरता। सरकार उचित नीतियां बनाकर सारा रुपया अपने पास...

कांग्रेस, कर्नाटक और नाटक

सोशल मीडिया पर एक विपक्षी ने मोदी जी के उन भाषणों का वीडियो पोस्ट कर दिया जिनमें वे गिरते रुपये के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कोस रहे हैं। वीडियो देखकर एक भाजपाई भड़क गया। उसने कमेंट में लिखा- ‘ज़्यादा अर्थशास्त्री बनने का नाटक मत करो और अपना कर्नाटक संभालो।’ राजनैतिक...
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