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इधर भी है उधर भी

कुर्सी का घमासान इधर भी है, उधर भी दो लोगों का गुणगान इधर भी है, उधर भी जो डेडिकेट है वो सिर्फ झंडे उठाए दल बदलुओं का मान, इधर भी है उधर भी जो हाँ में हाँ मिलाए, वही पद पे रहेगा सच कहने में नुक़सान इधर भी है, उधर भी किस्मत न बदल पाओ तो क्यों दल बदल रहे सिद्धू तो...

चाहत

दिल ऊँचाई पर जाना भी चाहता है और किसी से बतियाना भी चाहता है दीवाना है, ज़िंदा है जिसकी खातिर उसकी खातिर मर जाना भी चाहता है दिल दे बैठा है जिसके भोलेपन को उस पगली को समझाना भी चाहता है मुश्किल है, अंधियारे को रौशन करना जल जाना तो परवाना भी चाहता है सूरज रब बन जाता है...

अकेला

हर दिन बढ़ता ही जाता है मेरे आंगन का वीराना और अकेला कर जाता है हर दिन कोई यार मुझे ✍️ चिराग़ जैन

मुहब्बत सबको होती है

बहुत ज़्यादा न हो पर कुछ तो हसरत सबको होती है जहाँ में नाम और शोहरत की चाहत सबको होती है मरासिम हर दफ़ा ताज़िन्दगी निभता नहीं लेकिन किसी से इक दफ़ा सच्ची मुहब्बत सबको होती है मन अपने आप से भी इक ना इक दिन ऊब जाता है किसी अपने की दुनिया में ज़रूरत सबको होती है हर इक मुज़रिम...

मुहाने तक नहीं पहुँची

किसी की ज़िन्दगी अपने ठिकाने तक नहीं पहुँची किसी की मौत ही वादा निभाने तक नहीं पहुँची बुज़ुर्गों की क़दमबोसी मेरी फितरत रही लेकिन मेरी हसरत कभी उनके ‘सिराने तक नहीं पहुँची ज़माने के लिए जो शख्स घुट-घुट कर मरा आख़िर ख़बर उस शख्स की ज़ालिम ज़माने तक नहीं पहुँची हवा के साथ उसकी...

खालीपन

जिस दरपन ने तुम्हें निहारा, उस दरपन का खालीपन और सघन कर देता है इस अंतर्मन का खालीपन कल तक आंगन में उनके आने की कोई आस तो थी अब तो भुतहा सा लगता है इस आंगन का खालीपन सारा कुछ खोकर भी जाने किसे जीतने निकला हूँ शायद मुझमें घर कर बैठा है रावन का खालीपन मेरा सब कुछ लेकर...
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