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आचरण श्रीराम जैसा

राजवैभव की नहीं है चाह कोई कीर्ति की, यश की नहीं परवाह कोई जय-पराजय की घड़ी में मन सहज हो शोक हो, भय हो, न हो उत्साह कोई राम, मुझको दो भले मत आवरण श्रीराम जैसा दे सको तो, दो मुझे बस आचरण श्रीराम जैसा जग जिसे पाषाण माने, देख लूँ मैं साँस उसकी जो नदी-तट पर खड़ा हो, जान...

भूल

क्यों भला भाती नहीं शीतल नदी की धार यूँ समझ लो आप अपनी प्यास को भूले हुए हो ख़ुश हुए तो भूल बैठे दर्द का उपकार रो पड़े तो प्राण के उल्लास को भूले हुए हो आज से पीछा छुड़ाकर भागते हो एक कोरे ख़्वाब के संग जागते हो क्यों हज़ारों ख़्वाहिशों का ढो रहे हो भार आप शायद वक़्त...

अज्ञातवास

राज्य, वैभव और निज पहचान तक से हाथ धोकर चल दिये पाण्डव स्वयं के शौर्य से अज्ञात होकर वीरता के उपकरण को गौण रहना है शक्ति को अब होंठ सीकर मौन रहना है भाग्य ने क्या खेल खेला है विवशता के पलों में सूख जाने की अनोखी खलबली है बादलों में शस्त्र, जिनको प्राप्त करने के लिए...

अस्तित्व का मूल्य

हाँ, जगत् में एक कण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस कण की चमक दुगुनी करेगा हाँ, समय में एक क्षण के अंश-सा अस्तित्व हूँ मैं पर मेरा व्यक्तित्व इस क्षण की दमक दुगुनी करेगा साँस है बस दास प्राणों की किसी आह्लाद के बिन हर इमारत ताश का घर है महज; बुनियाद...

आँख भर आई

रास्ता दूभर बहुत था हारने का डर बहुत था राह की धरती नहीं थी चाह का अम्बर बहुत था जूझने में व्यस्त थे, सुबकी नहीं आई जीतने पर आँख भर आई ज़िन्दगी की नाव की पतवार का एहसास भी था साथ ही इस अनकहे से प्यार का आभास भी था यूँ समझ लो, द्वार पर शिशुपाल भी था, कंस भी था और मन के...

आराम का एक दिन

रात काटें जागकर हम दिन बिताते भागकर हम व्यस्तता से घिर रहे हैं क्यों उनींदे फिर रहे हैं इस थकन के भाग्य में आराम कुछ घोलें आओ कुछ पल चैन से सो लें एक दिन ऐसा जुटा लें, जब कोई भी काम ना हो आँख में ख्वाहिश नहीं हो, श्वास में संग्राम ना हो व्यस्तता के ढेर से बस एक दिन...
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