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संबंधों की परिभाषा

जग सीमित करना चाहे, सम्बन्धों को परिभाषा में कैसे व्यक्त करूँ मैं भावों की बोली को भाषा में क्या बतलाऊँ मीरा संग मुरारी का क्या नाता है शबरी के आंगन से अवध बिहारी का क्या नाता है क्यों धरती के तपने पर अम्बर बादल बन झरता है क्यों दीपक का तेल स्वयं बाती केे बदले जरता है...

निस्पृह प्रेम

चाहता हूँ उन्हें ये अलग बात है वो मिलें ना मिलें ये अलग बात है एक अहसास से दिल महकने लगा गुल खिलें ना खिलें ये अलग बात है हम मिलें और मिलते रहें हर जनम ज़िन्दगी भर का नाता बने ना बने मन समर्पण के सद्भाव से पूर्ण हों तन भले ही प्रदाता बने ना बने बात दिल की दिलों तक...

मुझे तुम भूल सकते थे

फ़ज़ाई रक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे तुम्हारा अक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे तुम्हारी चाह हूँ, आदत, इबादत हूँ, मुहब्बत हूँ महज इक शख़्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे ✍️ चिराग़...

गीत लिखते वक़्त

इक दफ़ा पलकों को अश्क़ों में भिगो लेते हैं हम और फिर अधरों पे इक मुस्कान बो लेते हैं हम गीत गाते वक्त रुंध ना जाए स्वर इसके लिए गीत लिखते वक्त ही जी भर के रो लेते हैं हम ✍️ चिराग़...

याद

कभी जब नीम की डाली पे चिड़ियाँ चहचहाती हैं हज़ारों ख्वाहिशें दिल में तड़पकर कुलबुलाती हैं मेरे आगे से जब भी ख़ुशनुमा मंज़र गुज़रते हैं किसी की याद में भरकर ये आँखें छलछलाती हैं ✍️ चिराग़...

क़हक़हे

बिल्कुल ख़ाली कर दिया है मैंने दिल का भरा-पूरा मकान आँखों की बाल्टी में आँसुओं का पानी भरकर धो डाला है मकान का एक-एक कोना …काफ़ी दिन हुए। लेकिन अब भी गूंजते हैं यादों के क़हक़हे टकराकर ख़ाली मकान की ख़ामोश दीवारों से। और मैं फिर से धोने लगता हूँ दिल के मकान की उदास...
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