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पुरुषोत्तम: एक मंचन जिसकी पटकथा नहीं लिखी गई

हुई है वही, जो राम रचि राखा मुझे अक्सर ऐसा अनुभव होता है कि मैं एक ऐसी स्क्रिप्ट जी रहा हूँ, जिसमें मेरे लिए एक शानदार पार्ट लिखा गया है। ऐसा लगता है कि जीवन अलग-अलग किस्सों का एक पोथा है, जो अपनी बेहतरीन बुनावट के कारण एक उपन्यास सरीखा जान पड़ता है। आइए, इस पोथी के...

सृजन सुख

इस तपोवन में सृजन की साधनाएँ चल रही हैं ध्वंस से कह दो यहाँ उसके लिए अवसर नहीं है मन गहन संवेदना अनुभूत करने में जुटा है तन अभी स्वर-व्यंजनों में प्राण भरने में जुटा है भाव का उत्कर्ष छूकर नयन खारे हो रहे हैं इस सृजन सुख में जगत् के डर किनारे हो रहे हैं शब्द से सच का...

सेना- गार्जियन ऑफ द नेशन

सेना के शौर्य पर बने अन्य चलचित्रों की भाँति ‘सेना- गार्जियन ऑफ द नेशन’ में भी सैनिकों की चुनौतियों, सैन्य जीवन की कठिन परिस्थितियों तथा उनके परिवारों के भावनात्मक पक्ष को प्रकाशित करने का एक और प्रयास किया गया है। कार्तिक शर्मा की मुख्य भूमिका में विक्रम...

पराश्रित प्रतिभा

द्रुपद से प्रतिशोध की आकांक्षा रखनेवाले द्रोण जब आश्रम की शुचिता में राजनीति का हस्तक्षेप स्वीकार कर लेते हैं तब केवल कुछ कर्ण और एकलव्य ही अन्याय का दंश झेलते हैं। किन्तु यदि कोई प्रतिभाशाली कर्ण किसी भी परिस्थिति में अपनी निष्ठा के अश्व किसी दुर्योधन के द्वार पर...
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