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राखी का त्यौहार

महानगर में इस तरह, बदला हर त्यौहार अब तोरण करते नहीं, खड़िया का शृंगार रेडिमेड में ढँक गया, सारा हर्ष-किलोल सोन बनाती बेटियाँ, खड़िया-गेरू घोल ना मोली की सौम्यता, ना रेशम की डोर अब राखी पर दिख रहा, प्लास्टिक चारों ओर कितना डेवलप हो गया, ये पुरख़ों का देस चॉकलेट ने कर...

वायरस

जब से डाउनलोड की है तुम्हारे नाम की फाइल बार-बार हैंग होता है दिल का सिस्टम …शायद फाइल में वायरस था जिसने सबसे पहले डी-एक्टिवेट किया ब्रेन का एंटी-वायरस और फिर करप्ट कर दिया ऑपरेटिंग सिस्टम ..स्लो कर दी मेमोरी …शायद इंस्टॉल करनी पड़ेगी नई विंडो ✍️ चिराग़...

लफ्ज़ों के शोर में

हालात ने जब-जब भी माजरा बढ़ा दिया जीने की हसरतों ने हौसला बढ़ा दिया लफ्ज़ों के शोर में ये समन्दर ख़मोश थे चुप्पी ने शाइरी का दायरा बढ़ा दिया यूँ ख़त्म हो चुका था रात को ही मसअला सुब्ह की सुर्ख़ियों ने मामला बढ़ा दिया कुछ पहले ही लज़ीज़ थीं चूल्हे की रोटियाँ फिर माँ की उंगलियों...

तुम्हारा आगमन

ये हवा कल भी बही थी ज़िन्दगी कल भी यही थी कुछ कमी कल भी नहीं थी पर तुम्हारे आगमन ने बीहड़ों में जान भर दी संग अधरों के लगाकर बाँसुरी में तान भर दी बिन तुम्हारे भी अधूरापन नहीं था ज़िन्दगी में पर ख़ुषी का भी कोई कारण नहीं था ज़िन्दगी में ये महक, ये बदलियाँ, ये बारिषंे कल...

कोई कैसे सच बोले

जब तक हमसे भाग्य हमारे खोटे होकर मिलते हैं बस तब ही तक हम लोगों से छोटे होकर मिलते हैं कोई कैसे सच बोले सबकी है अपनी लाचारी अब तो दर्पण से भी लोग मुखोटे होकर मिलते हैं जिनसे मतलब हो बस उनकी हाँ को हाँ कहते हैं जो उनका क्या है; बिन पेंदी की लोटे होकर मिलते हैं जब से...
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