Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
ऐसा मत सोचो कि जब सब सोचेंगे तब सोचेंगे
पहले हम सोचेंगे तब ही तो इक दिन सब सोचेंगे
आख़िर बंदूकों से ही जब सारे काम निकलने हैं
आयत रटने से क्या हासिल अहले-मक़तब सोचेंगे
दो और दो को पाँच बनाने की तरक़ीबें क्या होंगीं
इस उलझन का हल कुर्सी पर बैठे साहब सोचेंगे
आज जिन्हें मीठी लगती हैं, मेरी कड़वी बातें भी
कल वो मीठी बातों के भी कड़वे मतलब सोचेंगे
कल की चिन्ताओं पर अपना आज निछावर क्या करना
कल की छोड़ो, कल का क्या है, आएगा तब सोचेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
सज़ाओं में मैं रियायत का तलबदार नहीं
क़ुसूरवार हूँ कोई गुनाह्गार नहीं
मैं जानता हूँ कि मेरा क़ुसूर कितना है
मुझे किसी के फ़ैसले का इंतज़ार नहीं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
वाह के मज़मों में
अक्सर मौज़ूद होती है आह भी।
जैसे बहुत कुछ पा लेने पर भी
नहीं मिट पाती है कसक
कुछ खो जाने की।
दुःख जन्मता है
ख़ुशियों की कुक्षि से
कदाचित् यही सिद्ध करने के लिये
जलती हैं खलिहानों में रखी फ़सलें
फटते हैं धरती पर उतरते अंतरिक्ष-यान
मरते हैं जवान बेटे
फुँकते हैं बसे हुए घर
और छीन ली जाती है
घास की रोटी भी
भूखे बच्चों की उंगलियों से।
दुःख फैला है
धरती के कण-कण में
अविनाशी-सा
विराट, अरूपी, अमूर्त, अनवरत
अंधियारे-सा
सूनसान सन्नाटे की तरह
क्षितिज के छोर तक
सागर के तल पर झिलमिलाती
सूरज की किरण के समान
विशाल, अखण्ड और अनुपयोगी भी।
दुःख महसूस होता है
हृदय को प्रताड़ित करता
एक अनजाना-अनकहा एहसास
जो उभर आता है
अक़्सर सुख के बीच
सुन्दर कन्या के गाल पर
मुँहासे की तरह।
दुःख अमर्यादित है
शायद इसीलिये नहीं बंध पाता
शब्दों की मर्यादा में
क्योंकि दुःख है
सिर्फ़ एक एहसास
जिसे नकारना असम्भव है
…सुख की तरह
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
हम मुहब्बत का अंदाज़ा करेंगे
वो हिमाक़त का अंदाज़ा करेंगे
जब तलक दूरियाँ न हों शामिल
कैसे चाहत का अंदाज़ा करेंगे
आदमी को समझ न पाए जो
क्या वो क़ुदरत का अंदाज़ा करेंगे
दौरे-ग़म में कहे कोई कुछ भी
सब नसीहत का अंदाज़ा करेंगे
आदमी ज़िब्ह करने वाले ही
आदमीयत का अंदाज़ा करेंगे
ख़ुद ही आफ़त बुलाएंगे और फिर
ख़ुद ही राहत का अंदाज़ा करेंगे
जब भी बेबाक़ सच कहेंगे हम
वो बग़ावत का अंदाज़ा करेंगे
हम तो अपना समझ के कह देंगे
सब तिज़ारत का अंदाज़ा करेंगे
लोग मेरी हरेक हरक़त से
मिरी फितरत का अंदाज़ा करेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
किसी पत्थर से जब तूने ये हाले-दिल कहा होगा
तेरी आँखों से बरबस दर्द का सागर बहा होगा
मेरे दिल ने भी पीड़ा को हज़ारों बार झेला है
मुझे अहसास है तूने वो ग़म कैसे सहा होगा
✍️ चिराग़ जैन