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स्वार्थ

तीर कोरे स्वार्थ के जब तरकशों से जुड़ गए बाम पर बैठे कबूतर फड़फड़ाकर उड़ गए स्वार्थ शामिल हो गया जब से हमारी सोच में पग हमारे ख़ुद-ब-ख़ुद राहे-गुनाह पर मुड़ गए ✍️ चिराग़...

तमन्ना

है तमन्ना यही प्यार जीता रहे सबका जीवन गुनाहों से रीता रहे भावना सब के दिल में यही जन्म ले दुख मैं पीता रहूँ सुख तू पीता रहे ✍️ चिराग़...

मन में श्रद्धा हो तो

प्रेमी को प्रेमी का होना भर ही काफ़ी होता है मन में श्रद्धा हो तो इक पत्थर ही काफ़ी होता है ग़ैरों के संग रहना महलों में भी रास न आएगा अपनापन मिल जाए तो कच्चा घर ही काफ़ी होता है ✍️ चिराग़...

जो है वही कहना

किसी भी चोट को सहना बड़ा दुश्वार होता है जु़बां हो और चुप रहना बड़ा दुश्वार होता है ये माना दर्द को अभिव्यक्त करना भी ज़रूरी है मगर जो है वही कहना बड़ा दुश्वार होता है ✍️ चिराग़...

गुड्डी

गुड्डी के पापा लन्च में टिफ़िन खोलते समय मूंद लेते हैं आँखों को क्योंकि देख नहीं पाते हैं रोटियों से झाँकते तवे के सुराखों को। ईमानदार क्लर्क समझ नहीं सकता है क़िस्मत की गोटियों को इसलिए चुपचाप निगल लेता है बोलती हुई रोटियों को। गुड्डी अक्सर लेट पहुँचती है स्कूल नहीं...
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