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राम ने खोया बहुत श्रीराम बनने के लिए

त्याग दी हर कामना निष्काम बनने के लिए तीन पहरों तक तपा दिन, शाम बनने के लिए घर, नगर, परिवार, ममता, प्रेम, अपनापन, दुलार राम ने खोया बहुत श्रीराम बनने के लिए ✍️ चिराग़...

परोक्ष

किसी का क़द ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं किसी का पद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं कहाँ गहराई है किसकी यही सबको नहीं दिखता कोई बरगद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं ✍️ चिराग़...

पुल बनाओ तो सही

पुल बनाओ तो सही इस फ़ासले के सामने मुश्क़िलें ख़ुद हल बनेंगीं मसअले के सामने आंधियाँ राहों में बिछ जाएंगीं सजदे के लिए आसमां छोटा पड़ेगा हौसले के सामने जब जवानी चल पड़ेगी बांधकर सर पर क़फ़न कौन फिर आएगा उसके फ़ैसले के सामने हिम्मतों ने ताक पर रखे ज़माने के उसूल ताश के घर कब...

लफ्ज़ों के शोर में

हालात ने जब-जब भी माजरा बढ़ा दिया जीने की हसरतों ने हौसला बढ़ा दिया लफ्ज़ों के शोर में ये समन्दर ख़मोश थे चुप्पी ने शाइरी का दायरा बढ़ा दिया यूँ ख़त्म हो चुका था रात को ही मसअला सुब्ह की सुर्ख़ियों ने मामला बढ़ा दिया कुछ पहले ही लज़ीज़ थीं चूल्हे की रोटियाँ फिर माँ की उंगलियों...

स्वीकार

बरसों से बरसते हैं अब क्या असर करेंगे बेबस ये बसेरे हैं कैसे बसर करेंगे रुकती है नज़र जाकर चूते हुए छप्पर पे छप्पर को भी गिरा दो खुलकर सबर करेंगे ✍️ चिराग़...
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