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पापा का जादू

न कोई ट्रिक है ना तकनीक पापा जादू से ही सब कुछ कर देते हैं ठीक दिन भर दुनिया भर के सब आघातों को सहते हैं रात ढले अपनी दुविधा बस अम्मा से कहते हैं इतने सीधे-सच्चे हैं हर छल से हिल जाते हैं जब अपने बच्चों से मिलते हैं तो खिल जाते हैं झट से ग़ायब हो जाती है चिंताओं की...

इतना-सा प्यार

अपनेपन के बाहुपाश में धड़कन ने ये शब्द सुनाए- “अलग-अलग कर्त्तव्य रहें; पर आपस का अधिकार बहुत है।” बस इतना-सा प्यार बहुत है सबकी अपनी-अपनी गति है, सबका अपना-अपना पथ है सूरज के कुनबे में लेकिन, ना कोई इति है ना अथ है हम-तुम अगर निकट से गुज़रे, इस अनवरत अथक...

शोर

चीखने से शोर बढ़ता है सम्बन्ध नहीं। सुकून की खटिया बुनी जाती है सहजता की बाण से; इसमें प्रयास की गाँठें हों तो मुक्त नहीं हो सकती नींद चुभन से! जताना और बताना व्यापार में होना चाहिए व्यवहार में नहीं। और प्यार में… …वहाँ तो आँखें मिलते ही फिफ्थ गीयर लग जाता...

अब उसकी कुछ आस नहीं है

सूखी हुई नदी के तट पर नौका लेकर आने वाले जिस कलकल को ढूंढ रहा है अब उसकी कुछ आस नहीं है चलते-चलते बहा पसीना, ठहर-ठहर कर नदिया सूखी तू होता जाता था लथपथ, वो होती जाती थी रूखी लहर-लहर लहरा-लहरा कर तुझको पास बुलाने वाले जिस आँचल को ढूंढ रहा है अब उसकी कुछ आस नहीं है माना...

रक्षाबंधन

‘बंधन भी सुख का कारण हो सकता है’ – इस अद्भुत सत्य का अनोखा उदाहरण है रक्षाबंधन! यद्यपि मैं जानता हूँ कि ईश्वर ने सृष्टि के प्रत्येक प्राणी को आत्मरक्षा हेतु आत्मनिर्भर बनाया है तथापि मुझे इस बात का एहसास है कि नाड़ी पर एक धागा बांधकर मन में अपनत्व की जिस अपेक्षा...
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