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फ़ुरसत

धूप इक रोज़ ढल ही जाती है उम्र सूरत बदल ही जाती है थोड़ी फ़ुरसत निकालकर देखो ज़िन्दगी तो निकल ही जाती है ✍️ चिराग़...

ख़ुदशनास

यूँ न समझो उदास बैठा हूँ आज मैं ख़ुदशनास बैठा हूँ मुझसे कोई अभी न बात करो मैं अभी अपने पास बैठा हूँ ✍️ चिराग़...

धैर्य

हे अर्जुन, सूर्यास्त को देखकर न धैर्य छोड़ो, न धनुष; हो सकता है सूर्य गया हो जयद्रथ को बुलाने! ✍️ चिराग़...

काँच

मैंने काँच से सीखा है कि दुनिया को सच दिखाने के लिए छोड़ना ही पड़ता है पारदर्शी स्वभाव ✍️ चिराग़...

आकलन और आलोचना

जो लोग कला फ़िल्मों के मापदण्ड से सी-ग्रेड सिनेमा का आकलन करने निकले हैं, उनकी बुद्धि किसी का आकलन करने के लिए सक्षम नहीं है। वे आलोचना करने के प्रयास में विद्रूपता को प्रचारित कर रहे होते हैं और उन्हें आभास भी नहीं होता कि वे क्या पाप कर रहे हैं। सिद्धांत तो यह है कि...
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