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फ़ुरसत

धूप इक रोज़ ढल ही जाती है
उम्र सूरत बदल ही जाती है
थोड़ी फ़ुरसत निकालकर देखो
ज़िन्दगी तो निकल ही जाती है

✍️ चिराग़ जैन

ख़ुदशनास

यूँ न समझो उदास बैठा हूँ
आज मैं ख़ुदशनास बैठा हूँ
मुझसे कोई अभी न बात करो
मैं अभी अपने पास बैठा हूँ

✍️ चिराग़ जैन

धैर्य

हे अर्जुन,
सूर्यास्त को देखकर
न धैर्य छोड़ो,
न धनुष;
हो सकता है
सूर्य गया हो
जयद्रथ को बुलाने!

✍️ चिराग़ जैन

काँच

मैंने काँच से सीखा है
कि
दुनिया को
सच दिखाने के लिए
छोड़ना ही पड़ता है
पारदर्शी स्वभाव

✍️ चिराग़ जैन

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