+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

मशहूर कविता, गुमनाम कवि

रचना और रचनाकार का सम्बन्ध पिता और सन्तति का सम्बन्ध होता है। यह किसी रचनाकार की सफलता का उत्कर्ष है कि उसकी कोई पंक्ति जनभाषा के मुहावरे में शुमार हो जाये। ‘अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो’ से लेकर ‘पोशम्पा भई पोशम्पा’ तक का हमारा बचपन ऐसी ही सौभाग्यशाली कविताओं की उंगली थामकर...

तहख़ाना

विचारों के भाजी बाज़ार से दूर, मस्तिष्क के पिछवाड़े वाले तहख़ाने में भरे पड़े हैं ऐसे हज़ारों बिम्ब जिन्हें आँखों ने चित्त के शिकंजे से बचाकर यहाँ छिपा दिया था। जब कभी सहजता की सवारी करके प्रिविष्ट हुआ हूँ इस तहख़ाने में बस तभी बटोर लाया हूँ …ढेर सारे बिम्ब …ढेर...

कान्हा की उंगली पर गौवर्द्धन

जिनकी कविताएँ पढ़कर मन प्रसन्न हो जाता है, उन सब युवाओं की पिछले दो-तीन दिन की क़वायद ने बुझती हुई आँखों में नयी रौशनी भर दी है। दिन-रात लगकर ये सब अनजान लोगों की मदद के लिये सबके आगे हाथ फैला रहे हैं। न खाने का होश है न पीने की चिंता। बस यहाँ ऑक्सीजन, वहाँ इंजेक्शन,...

विद्वेष और कविता

कविता मुहब्बत की ज़ुबान है। किसी भी परिस्थिति में घृणा के उद्वेग बोने का काम कविता नहीं कर सकती। कविता बलिदान का शौर्यगायन कर सकती है, किन्तु किसी को ‘किसी भी परिस्थिति में’ बलि लेने के लिए उकसा नहीं सकती। किसी भी वाद या विचार से दूर मनुष्यता को सर्वाेपरि रखना कवि होने...

छूकर निकली है बेचैनी

अनुभूतियाँ ज्यों-ज्यों ऊँची उठती जाती हैं, त्यों-त्यों उनकी उड़ान सहज होने लगती है। और एक सीमा के बाद उन्हें पंख नहीं हिलाने पड़ते, वे स्वतः ही सृजन के आकाश में तैरने लगती हैं। फिर उड़ान, उड़ान न रहकर बहाव बन जाती है। बस यही बहाव गीत का प्राणतत्त्व है। शिल्प की...
error: Content is protected !!