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रमेश मुस्कान

‘रमेश मुस्कान’ -यह किसी व्यक्ति का नहीं, एक प्रवृत्ति का नाम है। ज़िन्दगी उन्हें कितनी ही सैड सिचुएशन दे, वे उसको ठहाके की ओर मोड़कर उसका ‘दी एन्ड’ करने में माहिर हैं। कई बार कुछ लोगों को देखकर ऐसा लगता है कि इनके जीवन में कोई चुनौती, कोई परेशानी है ही नहीं। लेकिन ध्यान...

होलीपुरा कवि-सम्मेलन

आगरा शहर पीछे छूट रहा था और राजमार्ग सकुचाते हुए एक समान्य सी सड़क में समा गया था। निमंत्रण देते समय ही होलीपुरा के वयोवृद्ध गीतकार शिवसागर शर्मा जी ने बता दिया था कि सड़क पर गाय-मवेशी बहुत मिलेंगे इसलिए गाड़ी आराम से ही दौड़ाना। ज्यों-ज्यों हम आगरे की शहरी आबोहवा से...

तो क्या हुआ

तो क्या हुआ, अगर जीवन में थोड़ा-सा संत्रास लिखा है जिसने जितनी पीड़ा झेली, उतना ही इतिहास लिखा है जिस काया में गर्भ विराजे उसकी रंगत खो जाती है अन्न उपजना होता है तो धरती छलनी हो जाती है जो डाली फलती है उसको बोझा भी ढोना पड़ता है भोर अगर नम होती है, तो रातों को रोना पड़ता...

सृजन और आलोचना

जिनका कोई अर्थ नहीं है, उन पर क़लम चलाना छोड़ें जो चर्चा को दूषित कर दें, उन सबको समझाना छोड़ें हमें ओस के कण चुन-चुनकर, अपने सपने सच करने हैं अपनी ओस बचाना सीखें, उनके पेड़ हिलाना छोड़ें ✍️ चिराग़...

कविता बुन लेता हूँ

शोर-शराबे में भी दिल की धड़कन सुन लेता हूँ यूँ कविता बुन लेता हूँ इस दुनिया के छोटे-छोटे हिस्से घूम रहे हैं लोग नहीं हैं, दो पैरों पर किस्से घूम रहे हैं होंठों पर मुस्कान दिखी, मस्तक ग़मगीन दिखे हैं हर चेहरे को पढ़कर देखो, कितने सीन लिखे हैं इस सारी सामग्री में से मोती...
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