जिस समय नल और नील समुद्र की लहरों को बांधकर सेतुनिर्माण कर रहे थे, उस समय रावण “भालू-बन्दरों की भीड़” कहकर रामदल का उपहास कर रहा था। यदि नल-नील ने उस उपहास का उत्तर देने में ऊर्जा निवेश की होती तो राम की सेना कभी सागर पार नहीं कर पाती। ✍️ चिराग़...
ना तो किसी रोग से टूटा ना ही समरांगण में हारा जिस राजा का शौर्य अमर था उसको कोपभवन ने मारा उसकी देह धराशायी थी, जिसका नाम स्वयं दशरथ था तन पर कोई घाव नहीं था, पर अंतर्मन से लथपथ था वाणी से विषबाण चलाकर, जीवन का अमरित ले बैठी जिसने हर रण जीता उसको इक रानी की जिद ले...
बल के घमण्ड में नियम किये खण्ड-खण्ड, यही बल यश की कुदाल सिद्ध हो गया जिसको समझकर तुच्छ पूँछ फूँक दी थी, वह भी भयानक कराल सिद्ध हो गया जिसने भी टोका उसे घर से निकाल दिया, यही आचरण विकराल सिद्ध हो गया जिसको दशानन समझता था शक्तिहीन, वह वनवासी महाकाल सिद्ध हो गया ✍️...