+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

उदित राज को समर्पित

जब तक टिकट नहीं कट जाती तब तक सब कुछ चलता है सब कुछ है चलता है टिकट का कटना खलता है जिस पुलवामा की घटना को साज़िश आप बताए उस घटना के घटने पर क्यों दल को छोड़ न पाए जिसकी खाट खड़ी हो जाए वो ही आँखें मलता है आंखें मलता है, टिकट का कटना खलता है राष्ट्रपति को गूंगा-बहरा कहते...

रात से रिश्वत ली है

जीत ने मात से रिश्वत ली है दिल ने जज़्बात से रिश्वत ली है चांदनी कम है अंधेरा ज़्यादा चांद ने रात से रिश्वत ली है फिर से बारिश में चुएगा छप्पर इसने बरसात से रिश्वत ली है सब समय की दुहाई देते हैं सबने हालात से रिश्वत ली है मुझको लगता है मिरी नींदों नें कुछ ख़यालात से...

ग़रीबी

रुके आँसू, दबी चीखें, बंधी मुट्ठी, भिंचे जबड़े इन्हीं के तर्जुमे से मुल्क़ में विस्फोट होता है ये बम रखने का काम अच्छा-बुरा औरों की ख़ातिर है ग़रीबी के लिए तो सिर्फ़ सौ का नोट होता है ✍️ चिराग़...

गर्व से कहो हम भ्रष्ट हैं

ओलंपिक हो या आस्कर, क्रिकेट हो या हाॅकी और विज्ञान हो या तकनीक; हमारा देश हमेशा ‘नम्बर वन’ बनने से चूक जाता है। पिछले दिनों एक उम्मीद तब बंधी जब एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने विश्व के सबसे भ्रष्ट राष्ट्र का चयन करने का निश्चय किया। भ्रष्टाचार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। न...

मापदण्ड

टूट गया था मैं ठीक वैसे ही ज्यों कठोर धरातल पर गिरते ही टूट जाता है कच्चा बर्तन। क्वारी-गर्भवती कन्या के मजबूर बाप की तरह कसमसा उठी थी मेरी आत्मा। जून की झुलसती गर्मी में सड़क-किनारे खड़े शिकंजीवाले की गीली रेहड़ी पर पड़े बर्फ़ के छोटे-से टुकड़े की तरह पिघल गईं थीं मेरी...
error: Content is protected !!