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डोनाल्ड ट्रम्प को देखकर मुझे उस खिलौने की याद आती है, जिसे चाबी भरकर ज़मीन पर छोड़ दिया गया है। जिसमें किसी ने सोलर बैटरी डाल दी है और अब यह खिलौना तब तक नहीं रुकेगा, जब तक दुनिया में परमानेंट सनसेट न हो जाए।
जिसने इस खिलौने का आविष्कार किया है, उसने इसके सिर में से ब्रेन और सीने में से हार्ट निकालकर, उन दोनों स्थानों पर भी ओवर-कॉन्फिडेंस का पाउडर भर दिया है। उनके इसी बायोलॉजिकल ढांचे का परिणाम है कि उन्होंने सोचने और महसूस करने में मानवीय सीमाओं को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
ट्रम्प जीपीएस से रास्ता नहीं पूछते, बल्कि रास्ता, ट्रम्प से जीपीएस पूछता है। ट्रम्प सांस नहीं लेते, बल्कि सांस जीवित रहने के लिए ट्रम्प के नथुनों में घुसती है। ट्रम्प हवाईजहाज में नहीं उड़ते, बल्कि हवाईजहाज उड़ने के लिए ट्रम्प को अपने हृदय में विराजमान करता है। वह दिन दूर नहीं जब हवाईजहाज के पायलट अपनी कॉकपिट में ट्रम्प के फोटो पर माला-वाला चढ़कर जहाज उड़ाया करेंगे।
सामान्य इंसानों की तरह ट्रम्प की शिक्षा-दीक्षा भी सामान्य नहीं रही है। बल्कि उन्हें मास्टरजी एक खाली शीट दिया करते थे, जिस पर वे अपनी अलौकिक शैली में कुछ चीट-मकौड़े बना दिया करते थे। इसके बाद पूरी सृष्टि के जीव मिलकर उनकी इस लिपि को पढ़ने का प्रयास करते थे। ट्रम्प दो बार अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए, लेकिन उनकी उत्तरपुस्तिकाएं आज तक डीकोड नहीं की जा सकी हैं। संभव है उसी लिपि को डीकोड करने के उद्देश्य से नासा ने अंतरिक्ष में अपने स्टेशन बनाए हों, ताकि इस महान जीव के शिलालेखों को अन्य आकाशगंगाओं तक पहुंचाकर, उनका अर्थ समझा जा सके।
वे जो कुछ करते हैं, वह महान और ऐतिहासिक होता है। विश्व में सबसे बड़ा, विश्व में सबसे उंचा और विश्व में सबसे लम्बा उनके हर कार्य के साथ जुड़ जाता है। और यह बात तो दुनिया भी मानती है कि फेंकने के मामले में वे विश्व में सबसे लम्बी फेंकते हैं।
अपने कीर्तिमानों की लिस्ट बनाने के लिए वे घटनाओं के मोहताज नहीं हैं। उनसे जुड़कर छोटी से छोटी घटना भी महान हो जाती है। किसी दिन वे यह भी घोषणा कर सकते हैं कि वे विश्व में सबसे नीला कोट पहनते हैं या फिर वे पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जो हंसते हुए आंखें बंद कर लेता है।
वे एक विराट पुरुष हैं। पूरी कायनात उनके आगे हाथ बांधकर उनसे पूछती रहती है, ‘मेरे बाप, आखिर तू चाहता क्या है।’ यह प्रश्न सुनकर वे अपने होंठों को उड़न-तश्तरी के आकार में फैला लेते हैं, उनकी आंखें मुंद जाती हैं, उनके हाथ-पैर थिरकने लगते हैं और वे परम-आनन्द की मुद्रा में नृत्यमग्न हो जाते हैं।
उनके मस्तिष्क को ठीक करने के उद्देश्य से जब कोई हवा का झोंका उनकी जुल्फ़ों के गहन जंगल में प्रवेश करता है, तो वे अपने सिर को ऐसे झटकते हैं कि हवा के झोंके गश खाकर गिर जाते हैं। समझ नहीं आता कि वे हवा से चिढ़कर ऐसा कर रहे हैं या फिर उन्हें आनन्द आ रहा है। अंततः हवा को सीधे पूछना पड़ता है, ‘हुज़ूर, कृपया स्पष्ट बताएं कि मैं चलूं या रुकूं?’
जब वे किसी की प्रशंसा का ट्वीट करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे कोई लड़की, ब्याह से पहले, अपने होनेवाले ससुराल के विषय में अपनी सहेलियों को बता रही हो। ससुराल के लोग तो छोड़ो, ससुराल की गली के कुत्ते-बिल्लियों को भी श्रेष्ठ सिद्ध कर रही हो। लेकिन जब वे किसी की आलोचना का ट्वीट करते हैं, तो ऐसा लगता है कि ब्याह के बाद ससुराल से मायके लौटी लड़की अपनी सास और ननद को भर-भर कर गालियां दे रही हो।
हिटलर, मुसोलिनी, गद्दाफी और यहां तक कि तुगलक जैसे ऐतिहासिक सनकी भी ट्रम्प की प्रतिभा के आगे नतमस्तक हैं। दुनिया के अनेक देश इस सनकवीर की महानता का अनुभव कर चुके हैं।
दरअस्ल ट्रम्प, धरती पर आ गिरे एक ऐसे पिंड हैं, जो अपनी गैलेक्सी का रास्ता भटक गए हैं। दुनिया उन्हें भटका हुआ मुसाफ़िर न समझ ले, इसलिए वे दुनिया को भटकाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

✍️ चिराग़ जैन

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