+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

मुबारक हो, मुहब्बत मर रही है

सभी की आँख में अंगार बोये जा चुके हैं सभी की बोलियों में ख़ार बोये जा चुके हैं। सभी की मुट्ठियाँ भिंचने लगी हैं लकीरें बेसबब खिंचने लगी हैं सभी के दाँत अब पिसने लगे हैं पुराने ज़ख़्म फिर रिसने लगे हैं ये जलवा भी सियासत कर चुकी है हर इक दिल में शिक़ायत भर चुकी है सुना है...

रंग में भंग

होली के हुड़दंग में रंग में भंग पड़ गयी इधर ठण्डाई गले से नीचे उतरी उधर भांग सिर पर चढ़ गई भोले की बूटी ने ऐसा झुमाया कि हाथ को लात और सिर को पैर समझ बैठा चूहा भी ख़ुद को शेर समझ बैठा नशे की झोंक में लफड़ा बड़ा हो गया पत्नी के सामने तनकर खड़ा हो गया पत्नी ने आँखें दिखाई तो...

अलविदा 2021

जब ढलेगा आज का सूरज तो उसके साथ ही बुझ जाएगी वो आख़िरी उम्मीद भी जो साल भर पहले लगा बैठे थे तुमसे हम सभी। याद है मुझको करोड़ों कामनाएं गूंज उठी थीं सभी मोबाइलों में; शुभ, मुबारक़ और कितने ही हसीं अल्फ़ाज़ लिखे थे तुम्हारे साथ घड़ी के एक-एक सेकेण्ड की आवाज़ पर उम्मीद का आकार...

चुनावी चक्कर

वोटों की गिनती भी शुरू नहीं हुई और एमपी में कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनने की बधाइयां छप गईं पूरी कांग्रेस पार्टी इन्हीं हरकतों की वजह से खप गई अब अगर चुनाव का परिणाम पलट गया तो उन्हीं बधाइयों के तेल में हार के पकौड़े तले जाएंगे। उधर कांग्रेस के स्वघोषित मुख्यमंत्री...

रिश्तों को ज़िंदा रखना

कितना आसान है रिश्तों को फ़ना कर देना ज़रा-सी बात को दिल से लगा के रख लेना ग़ैर लोगों को, रक़ीबों को तवज़्ज़ो देना शक़ की तलवार से विश्वास को कर देना हलाल अपने लहजे को तल्ख़ियों के हवाले करना अपने मनसूबों में कर लेना सियासत को शुमार सामने वाले की हर बात ग़लत ठहराना उस की हर एक...

ख़ुद से मुख़ातिब

कितना आसान है दुनिया को ग़लत ठहराना थोड़ा चालाक रवैया ज़रा-सी अय्यारी झूठ को सच बना देने का क़रामाती गुर थोड़ी कज़बहसी थोड़ी ज़िद्द ज़रा-सी लफ़्फ़ाज़ी तेज़ आवाज़ औ’ मुद्दों को घुमाने का हुनर चन्द सिक्कों से ख़रीदे हुए दो-चार गवाह और इक इन्तहा बेअदबी की ढिठाई की…. ….कितना...
error: Content is protected !!