Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose, Story
राज्य में नियम बना कि जो भी नागरिक राजा की आलोचना करेगा, उसे मृत्युदंड दिया जाएगा।
भयभीत प्रजा मौन हो गई।
एक दिन एक मंत्री ने राजा का मूड देखकर सलाह देने की हिम्मत की- “महाराज, यदि प्रजा के बोलने पर रोक लगी रही तो लोगों के भीतर-भीतर गुस्सा भर जाएगा। और इससे क्रांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
राजा ने अगले ही दिन ‘भड़ास उत्सव’ का आयोजन किया। राज्य के मेला ग्राउंड में माइक लगाया गया। और आलोचना के लिए दो घंटे की अवधि सुनिश्चित कर दी गई।
आश्वस्त किया गया कि इन दो घंटों में राजा, राज्य, योजना, नीति, प्रक्रिया या तंत्र की आलोचना करनेवाले पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
नगर में आयोजन प्रारंभ हुआ और राजा अपने कानों में कपास उगाकर अपने महल में सो गया।
सभी नागरिक शिकायतों के पोथे लेकर आयोजन स्थल पर पहुँचे, लेकिन एक भी नागरिक राजा के विरुद्ध एक शब्द तक नहीं बोल पाया। क्योंकि दो घंटे तक तो मंत्रियों ने ही माइक नहीं छोड़ा।
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
आवरण मात्र हैं वस्त्र
आचरण नहीं!
क्योंकि राम
वैभव में भी
राम ही रहे
और
वन में भी
राम ही रहे
लेकिन रावण
वल्कल पहन कर भी
नहीं हो सका
साधु!
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
मैंने नाव से सीखा है
कि
तरने की प्रक्रिया
प्रारंभ होती है
उतरने से!
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
मिट्टी में
क्षमता होती
बीज की प्रवृत्ति बदलने की
तो
एक ही गुरुकुल में
एक ही गुरु से पढ़कर
सभी शिष्य युधिष्ठिर बन जातेे
कोई दुर्योधन न बना होता
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Prose, Seriously Funny
लो जी, बाज़ार में भी स्त्रीलिंग चांदी ने पुल्लिंग सोने की मोनोपॉली पर धावा बोल दिया है। अब खरे सोने की सामने टंच चांदी अकड़ कर चलने लगी है।
मैं तो उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ जब भतीजे के ब्याह से विदा होते समय बुआजी, मुँह बिचकाते हुए कहेंगी- ‘भाभी ने सोने के कंगन में बहका दिया। इकलौती ननद हूँ। एक जोड़ी चांदी की पजेब ही दे देती।’
चांदी की ऐसी चांदी हुई है कि सोने को उबासी आने लगी है। सोना ऐसा उपेक्षित-सा बैठा है जैसे राजेश खन्ना को धक्का देकर भीड़ ओमप्रकाश के ऑटोग्राफ लेने दौड़ पड़ी हो। इसी स्पीड से चांदी की कीमतें बढ़ती रहीं तो वो दिन दूर नहीं, जब लोग सोने के गहनों पर चांदी की पॉलिश करवाने लगेंगे।
सर्राफा बाज़ार चांदी कूट रहा है और चांदी मिल्खा सिंह की स्पीड से भागी चली जा रही है। हमारे बाज़ारों में ज़रा-सी हलचल होते ही भविष्यवाणियों का बाज़ार गरम हो जाता है।
मेरे एक रिश्तेदार ने मुझसे पूछा- ‘कुछ मार्किट-वार्किट में इन्वेस्ट किया है या नहीं?’
मैंने संकोच के साथ डींग हांकते हुए कहा- ‘जी गोल्ड बॉन्ड लिए हैं कुछ।’
उन्होंने हिकारत से मेरी ओर देखकर कहा- ‘कुछ नहीं रखा गोल्ड में, सिल्वर देखो बेटा सिल्वर।’
मैंने गोल्ड के मुँह पर ऐसी लानत पहले कभी नहीं देखी थी।
घर-परिवार का कोई समारोह हो या फिर चाय की दुकान, हर महफ़िल में कोई न कोई कॉन्फिडेंट भविष्यवक्ता अपने अनुभव से बता रहा होगा कि चांदी छह लाख तक जाएगी। शेयर बाज़ार का यह सबसे बड़ा लाभ है, जिनकी जेब में फूटी कौड़ी न हो, वो भी हज़ार-लाख-करोड़ की बातें करने का लुत्फ़ उठा सकते हैं। और जिसने हज़ार-पाँच सौ इन्वेस्ट कर दिये हों, उसे तो टाटा, बिड़ला से लेकर अम्बानी, अडानी तक को धंधा सिखाने का लाइसेंस मिल जाता है।
नुक्कड़ की चर्चाओं में उपस्थित अर्थशास्त्री चांदी की बढ़ती कीमतों का कारण भी बताते रहते हैं। एक विद्वान सोलर एनर्जी में चांदी की खपत का पत्ता फेंकता है तो दूसरा रूस-यूक्रेन यूद्ध से चांदी को जोड़कर उसे लाजवाब कर देता है। कोई इसे डोनाल्ड ट्रंप की शरारत बता रहा है तो कोई एलन मस्क की सीक्रेट बिज़नेस पॉलिसी को सार्वजनिक करके चांदी की कीमतों का भेद खोल देता है।
मैं भी घर से साबुन खरीदने निकला था, लेकिन नुक्कड़ की बातें सुनकर चांदी खरीदने निकल पड़ा। नहाना-धोना तो होता रहेगा, अगर चांदी नहीं खरीदी तो रातोंरात अमीर होने के मौके से हाथ धो बैठूंगा।
जिन फिल्मी गीतों में चांदी शब्द का प्रयोग हुआ है, मैंने उन्हें गुनगुनाना भी बंद कर दिया है। कहीं ऐसा न हो कि चांदी मेरे मुँह से बाहर निकल जाए और मैं रेंकता रह जाऊँ।
इन दिनों चांदी ने जो छलांग लगाई है, उस पर चांदी को ऊँची कूद का गोल्ड मेडल दिया जा सकता है। ओलम्पिक संघ ने इस विषय पर विचार भी किया लेकिन फिर ये सोचकर मन मसोस लिया कि कहीं चांदी राजकुमार के स्टाइल में ये न कह दे- ‘जानी, हम चांदी हैं, गोल्ड-वोल्ड जैसों को हम मुँह नहीं लगाते।’
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Poetry, Purushottam