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चुनावों से पहले पटाखे डरे हुए हैं

देश भर में दीवाली का माहौल है और बिहार में चुनाव का। हालाँकि राजनीति तो बिहार को ही अयोध्या मानकर अपने राजतिलक की प्रतीक्षा कर रही है। हर दल स्वयं को भरत माने बैठा है कि सत्ता के रामचंद्र जी आकर उसी से गले लगेंगे। सत्ता के गले पड़ने के लिए हर नेता ने ख़ुद के भरत होने...

उजाला

दीपक ने दिखाया- “मौन रहकर काम करो दीर्घायु हो जाएगा उजियारा।” पटाखे ने सिखाया- “धमाका करो शोर मचाओ! रौशनी से ज़्यादा ज़रूरी है रौशनी की गूँज।” मैं समझ गया कि मानवता क्यों रोकना चाहती है युद्ध क्यों सजाना चाहती है आरती। ✍️ चिराग़...

न्याय के मुँह पर जूता

भारतीय लोकतन्त्र लगभग उस मुकाम पर आ खड़ा हुआ है, जहाँ से ‘लोक’ और ‘तन्त्र’ के मध्य की खाई इतनी चौड़ी हो जाती है कि किसी के लिए भी दोनों ओर पैर रखकर टिके रहना असंभव हो जाए। एक ओर तन्त्र है, जो संविधान की मूल भावना से भटककर अपने-अपने वाद तथा अपने-अपने गुटों के साथ इस हद...

सदुपयोग

कमाने में इतने व्यस्त न हो जाना कि ख़र्चने के लिए समय ही न बचे। क्योंकि अपनी ज़िन्दगी के मालिक आप ख़र्चते समय होते हैं; कमाते समय तो श्रमिक होते हैं। ✍️ चिराग़...
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