बल के घमण्ड में नियम किये खण्ड-खण्ड, यही बल यश की कुदाल सिद्ध हो गया जिसको समझकर तुच्छ पूँछ फूँक दी थी, वह भी भयानक कराल सिद्ध हो गया जिसने भी टोका उसे घर से निकाल दिया, यही आचरण विकराल सिद्ध हो गया जिसको दशानन समझता था शक्तिहीन, वह वनवासी महाकाल सिद्ध हो गया ✍️...
राजवैभव की नहीं है चाह कोई कीर्ति की, यश की नहीं परवाह कोई जय-पराजय की घड़ी में मन सहज हो शोक हो, भय हो, न हो उत्साह कोई राम, मुझको दो भले मत आवरण श्रीराम जैसा दे सको तो, दो मुझे बस आचरण श्रीराम जैसा जग जिसे पाषाण माने, देख लूँ मैं साँस उसकी जो नदी-तट पर खड़ा हो, जान...
नित्य सजाती रही अंगना, प्रभु राम के दर्श की आस में शबरी आस की ऐसी निशंक तपस्या से दर्ज हुई इतिहास में शबरी सीता वियोग से व्याकुल थे, तब घुल गयी राम की प्यास में शबरी राम को भक्ति का स्वाद चखा गयी बेर की जूठी मिठास में शबरी ✍️ चिराग़...
साँस न थी पर आस की डोर पे जीवित थी दुखियारी अहल्या शाप के ताप को, स्वर्ग के पाप को झेल रही थी बेचारी अहल्या देखने में बस पाहन थी, मन में धरती से थी भारी अहल्या देखो शिला में भी प्राण बहे जब राम ने छूकर तारी अहल्या ✍️ चिराग़...