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कैसे लिखूँ

मस्त था मैं, भ्रमर-सा दीवाना था मैं, लेखनी प्रेयसी बन गई थी मेरी ऑंसुओं की अमानत संजोई बहुत, जुल्म से जंग-सी ठन गई थी मेरी एक दिन प्रेयसी मुझसे कहने लगी- “मेरे प्रीतम ये क्या कर दिया आपने मेरे बचपन को क्यों रक्त-रंजित किया, मांग में रक्त क्यों भर दिया आपने क्यों...

चाहत

मैं मुहब्बत का सुगम-संगीत लिखना चाहता हूँ कंदरा संग पर्वतों की प्रीत लिखना चाहता हूँ उत्तरा का मूक-वैधव्य जकड़ लेता है मुझको जब कभी मैं पांडवों की जीत लिखना चाहता हूँ ✍️ चिराग़...

सरस्वती वन्दना

वरदान दे दे मुझे छंद-गीत-कविता का, वाग्देवी तेरा उपकार मांगता हूँ मैं रंग-ओ-तरंग तेरे संग से मिलेगा मुझे, जीवन में तेरे सुविचार मांगता हूँ मैं मृदु-सौम्य-भावपूर्ण वाणी बोलने के लिए वाणी तेरे सभ्य-संस्कार मांगता हूँ मैं वाणी का वरद् सुत बन के जिऊँ मैं यहाँ, हंसवाहिनी...

इबादत

उनकी बातों में इक इबारत है उनसे मिलना भी इक इबादत है इस ज़मीं के ख़ुदा हैं वो बन्दे जिनके दिल में कहीं मुहब्बत है ✍️ चिराग़...

कविता

ज्वार भावनाओं का जो मन में उमड़ता है, तब आखरों का रूप धरती है कविता आस-पास घट रहे हादसों की कीचड़ में कुमुदिनी बन के उभरती है कविता प्रेयसी के रूप में सँवरती है कविता; औ शहीदों की अरथी पे झरती है कविता लोग मानते हैं काग़जों पे लिखी जा रही है, कवि जानते हैं कि उतरती है...

मानवता

अपने आप से दूर हो रहे लोग इंसानियत से अधिक आवश्यक हो रहे भोग अदालतों में टूटता भाई-बहन का प्यार अस्सी साल की नारी का बलात्कार पश्चिम की धुनों पर थिरकता यौवन चुनाव-दर-चुनाव बढ़ता प्रलोभन बेटियों को बेचकर ख़रीदा गया राशन धर्ममंचों से पढ़ा जा रहा राजनैतिक भाषण स्कूलों के...
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