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इक लड़की

प्यार की बयार में ये दिल झूम नाचता है जब दिल में उतरती है इक लड़की नित नए रंग, नित नई मुस्कान लिए मन में उमंग भरती है इक लड़की जीवन की सूनी बगिया महकती है जब पारिजात बन झरती है इक लड़की दिल ट्रिन-ट्रिन बजता है रोज़-रोज़ जब सांझ ढले फोन करती है इक लड़की ✍️ चिराग़...

तुम्हारा आगमन

ये हवा कल भी बही थी ज़िन्दगी कल भी यही थी कुछ कमी कल भी नहीं थी पर तुम्हारे आगमन ने बीहड़ों में जान भर दी संग अधरों के लगाकर बाँसुरी में तान भर दी बिन तुम्हारे भी अधूरापन नहीं था ज़िन्दगी में पर ख़ुषी का भी कोई कारण नहीं था ज़िन्दगी में ये महक, ये बदलियाँ, ये बारिषंे कल...

कोई कैसे सच बोले

जब तक हमसे भाग्य हमारे खोटे होकर मिलते हैं बस तब ही तक हम लोगों से छोटे होकर मिलते हैं कोई कैसे सच बोले सबकी है अपनी लाचारी अब तो दर्पण से भी लोग मुखोटे होकर मिलते हैं जिनसे मतलब हो बस उनकी हाँ को हाँ कहते हैं जो उनका क्या है; बिन पेंदी की लोटे होकर मिलते हैं जब से...

कुछ देर मिलन के बाद

दो पल को प्यास मिटाकर तुम घंटों तड़पाया करती हो कुछ देर मिलन के बाद प्रिये जब वापस जाया करती हो जब जाड़े की सुबह में तन को धूप सुहाने लगती है सबकी आँखों में जब अलसाई मस्ती छाने लगती है जब उस मीठे-मीठे मौसम में नींद-सी आने लगती है बस तभी अचानक हवा रंग में भंग मिलाने लगती...

वक़्त का हिण्डोला

घर के मुख्य द्वार की देहलीज पर बैठकर दफ़्तर से लौटते पापा की राह तकतीं नन्हीं-नन्हीं आँखें रोज़ शाम आशावादी दृष्टिकोण से निहारती थीं सड़क की ओर …कि पापा लेकर आएंगे कुछ न कुछ चिज्जी हमारे लिए। लेकिन लुप्त हो रही है ये स्नेहिल परंपरा पिछले कुछ वर्षों से बच नहीं पाती...

सियासत का ज़हर

सच के मंतर से सियासत का ज़हर काट दिया हाँ, ज़रा रास्ता मुश्क़िल था, मगर काट दिया वक्ते-रुख़सत तिरी ऑंखों की तरफ़ देखा था फिर तो बस तेरे तख़य्युल में सफ़र काट दिया फिर से कल रात मिरी मुफ़लिसी के ख़ंज़र ने मिरे बच्चों की तमन्नाओं का पर काट दिया सिर्फ़ शोपीस से कमरे को सजाने के लिए...
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