शरद रात्रि का चंद्रमा, किसे सुनावे पीर
ना जमना में नीर है, ना अंगना में खीर
सखी! शरद की पूर्णिमा, मन हो गया अधीर
मैं तरसूं निज श्याम को, दुनिया खाए खीर
✍️ चिराग़ जैन
शरद रात्रि का चंद्रमा, किसे सुनावे पीर
ना जमना में नीर है, ना अंगना में खीर
सखी! शरद की पूर्णिमा, मन हो गया अधीर
मैं तरसूं निज श्याम को, दुनिया खाए खीर
✍️ चिराग़ जैन
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