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लिखे किसी ने गीत तो समझो, मन को गहरी पीर मिली
सृजन हुआ उन्मुक्त तभी जब, ख़ुशियों को ज़ंजीर मिली
किस्से बने, कहानी फैली, चित्र सजे, कविता जन्मी
पर न मिली मजनू को लैला, ना रांझे को हीर मिली

✍️ चिराग़ जैन

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