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जनता की भूमिका

हमारे समाज की सबसे प्रभावी पाठशाला है सिनेमा। सिनेमा ने भारतीय समाज का निर्माण किया है। और समाज ही नहीं; सामाजिक चलन, प्रवृत्ति और यहाँ तक कि मानसिकता का भी निर्माण सिनेमा ने ही किया है। हमने सिनेमा से सीखा है कि आम जनता कीड़े-मकौड़े की तरह है, जिसकी न कोई इज़्ज़त है,...

छल

आपके पक्ष में खड़ा कोई सिपाही जब शत्रु के साथ छल करता है, तब वह आपके साथ छल करने का अभ्यास कर रहा होता है। ✍️ चिराग़...

जामनगर में कुछ छूट गया है…

3 मई को जामनगर स्थित रिलायंस टाउनशिप के कवि सम्मेलन के लिए घर से निकला। दिल्ली से राजकोट और राजकोट से जामनगर। इस यात्रा के सहयात्री बने प्रिय गजेन्द्र प्रियांशु। गजेन्द्र के साथ बतियाते हुए अवधी बोली का सहज लालित्य रसवृद्धि कर देता है। व्यवहार में गाँव की ठसक और...

सभ्यता की सीमा

अराजकता किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। स्थिति चाहे कोई भी हो, यदि सभ्यता की सीमा रेखा लांघकर उसका उपाय खोजा जाएगा तो यह पूरी सामाजिक व्यवस्था पर वज्रपात होगा। कोई राजनीतिज्ञ कितना भी भ्रष्ट क्यों न हो; यदि उस पर जूता या स्याही फेंकी जाए, यदि उसे थप्पड़ मारा जाए,...

कट्टरता

कट्टरता और परिपक्वता में केवल ‘भी’ और ‘ही’ का अन्तर है। ✍️ चिराग़ जैन
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