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शेर का मुँह

पहले शेर ने दूसरे से कहा यार इतना समृद्ध तो यह देश कभी नहीं रहा हो न हो, अपने भारतीय विकास की सबसे ऊँची सीढ़ी चढ़ रहे हैं ज़रूरत के लिए नहीं मूरत के लिए लड़ रहे हैं। दूसरे का उत्तर सुनने से पहले तीसरा शेर बीच में ही बोल पड़ा जितना ये लड़ रहे हैं उतना तो अपना अशोक भी...

आषाढ़ के दो दिन

एक वर्ष पूर्ण हो गया। आज ही के दिन सुबह दस बजे अपने घर को और घर के दरवाज़े पर खड़ी माँ को जी भरकर निहारने के बाद मैं अस्पताल पहुँच गया था। मेदांता के एक बेड पर मेरा नाम लिख दिया गया था। हाथ पर एक पट्टा बांध दिया गया था, जिसके रहते अस्पताल की अनुमति के बिना सशरीर उस...

इतना-सा प्यार

अपनेपन के बाहुपाश में धड़कन ने ये शब्द सुनाए- “अलग-अलग कर्त्तव्य रहें; पर आपस का अधिकार बहुत है।” बस इतना-सा प्यार बहुत है सबकी अपनी-अपनी गति है, सबका अपना-अपना पथ है सूरज के कुनबे में लेकिन, ना कोई इति है ना अथ है हम-तुम अगर निकट से गुज़रे, इस अनवरत अथक...

नसीब करवट बदल रहा है

कोई हमारे नसीब को इक नयी कहानी सुना रहा है हथेलियों पर कई लकीरें बना रहा है, मिटा रहा है बहुत दिनों से जिस एक खिड़की के पार किरणें न आ सकी थीं अब एक उम्मीद का परिंदा उसी के पल्ले हिला रहा है जिसे बचाने की कोशिशों में हरेक हसरत दबा ली हमने उसी अना को सलाम करके कहीं कोई...

बोया पेड़ बबूल का…

हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। अराजकता किसी समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती। जिन लोगों ने अपने राजनैतिक हित साधने के लिए आपको गाली देना सिखाया है, वे ही अपनी अन्तरराष्ट्रीय छवि बचाने के लिए आपको असभ्यता के आरोप में पार्टी से बाहर कर देते हैं। जिन लोगों...
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