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कुण्ठित के नाम पाती

हे कुण्ठेश! जिसकी कविता में कमी न निकाल सको, उसकी प्रस्तुति पर प्रश्न खड़े कर दो। जिसकी प्रस्तुति भी परफेक्ट हो, उसकी कविता की विषयवस्तु को कठघरे में घसीट लो। जो इस मोर्चे पर भी अंटे में न आए, उसके चरित्र पर कीचड़ उछाल दो। जिसका चरित्र भी कीचड़ से बच जाए, उसके निजी जीवन...

काश हम समझ सकें!

हर इक मर्यादा के उस पार न हो जाएँ इक रोज़ कहीं हम सब, बीमार न हो जाएँ लाइक्स और कमेंट्स बटोरने की ललक सोशल मीडिया यूज़र्स से जो न करवा दे, वही कम है। इस होड़ में किसी की चरित्र हत्या होती हो, तो होती रहे; किसी की जीवन भर की साधना पर कालिख़ पुतती हो तो पुत जाये; किसी का...

शिक़ायत करना मना है

दशकों तक परिश्रम करके तंत्र ने जनता को इतना सहनशील बनाया है कि लाख परेशानियाँ सहकर भी जनता शिक़ायत करने से परहेज करे। हम गाहे-बगाहे सत्ता और राजनीति को कोसते हैं। टेलिविज़न के सामने बैठकर राजनेताओं को भ्रष्ट कह लेते हैं; लेकिन हमारे सामने कुर्सी पर बैठा क्लर्क सामने खड़ी...

प्रेम : पावनता का द्वार

एक पहर ठहरी सखी, कान्हा जी के ठौर। पहुँची कोई और थी, लौटी कोई और।। योगेश छिब्बर जी का यह दोहा भारत में प्रेम के उत्कर्ष को समझने के लिये पर्याप्त हैं। भारत में प्रेम का चरम यह है कि मीरा ने जो प्रेमगीत रचे, वे भक्ति की मानक कविताएँ बनकर जग में प्रसिद्ध हुए। यह भारतीय...

प्यार समझना मुश्किल क्यों है

इस दुनिया में प्यार रहे तो भावों का सत्कार रहे तो कितना प्यारा होगा ये संसार समझना मुश्किल क्यों है प्यार समूचे जीवन का है सार; समझना मुश्किल क्यों है किस्सा सुनकर मन सबका कहता है इसमें भूल हुई है बिन मतलब की दुनियादारी पाँखुरियों में शूल हुई है जो रांझे के साथ हुई थी...
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