+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

सीरियसली फनी

इन दिनों चिराग़ जैन दैनिक भास्कर में साप्ताहिक स्तंभ लिख रहे हैं, जिसका स्लग है ‘सीरियसली फनी’। इन सभी लेखों को इसी नाम से एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की योजना है। पाठकों की सुविधा के लिए इन सभी रचनाओं को यहां संकलित किया जा रहा है।

अनुक्रम

महँगाई को डायन मत कहो प्लीज़

महंगाई के लिए सरकार को कोसने का चलन पुराना हो गया। ज़रा सी महँगाई क्या बढ़ी कि राशन-पानी लेकर सरकार पर चढ़ गए। अब समय बदल रहा है। अब ऐसी बातों पर लाइक और कमेंट नहीं आते। इसलिए कुछ अलग ढंग से सोचो। महँगाई के लिए सरकार को नहीं, विपक्ष को कोसो। सरकार तो कब से कह ही रही थी कि ईंधन के दाम बढ़ने के कोई...

रहिमन काग़ज़ राखिए…

कई बार ऐसा महसूस होता है कि धरती पर हमारा जन्म ही केवल काग़ज़ सम्भालने के लिए हुआ है। आपके पास काग़ज़ हैं, तो सब कुछ है। आपके पास घर है, लेकिन घर के काग़ज़ नहीं हैं तो भले ही आप महल में रह रहे हो, सरकार के लिए आप बेघर हो। लेकिन सड़क पर रहनेवाले बेघर के नाम की, किसी मकान की रजिस्ट्री अगर सरकारी...

सनक का साक्षात् धूमकेतु : डोनाल्ड ट्रम्प

डोनाल्ड ट्रम्प को देखकर मुझे उस खिलौने की याद आती है, जिसे चाबी भरकर ज़मीन पर छोड़ दिया गया है। जिसमें किसी ने सोलर बैटरी डाल दी है और अब यह खिलौना तब तक नहीं रुकेगा, जब तक दुनिया में परमानेंट सनसेट न हो जाए। जिसने इस खिलौने का आविष्कार किया है, उसने इसके सिर में से ब्रेन और सीने में से हार्ट...

ग्राहक सेवा केंद्र

जब आपको लगे कि संसार दुःखों का सागर है...! जब आपको लगे कि आपका ब्लड प्रेशर लो हो रहा है तो केवल एक काम कीजिए- किसी भी कम्पनी के ग्राहक सेवा केंद्र को फोन मिला लीजिए। इसके बाद आपको संसार के कण-कण में व्याप्त कष्ट बौने लगने लगेंगे। आपका रक्तचाप इतना ऊपर चला जाएगा कि आप ख़ुद उसे नीचे लाने की दवाई...

मुँह पर स्माइल, बगल में मिसाइल

इस समय पूरी दुनिया की राजनीति का एक ही ध्येय वाक्य है- "नैतिकता गई तेल लेने!" इसलिए जहाँ कहीं तेल मिल सकता है वहाँ के लिए पूरी दुनिया के नेता कान में तेल डालकर बैठे हैं। चूँकि तेल तिलों से ही निकलता है इसलिए तेल की हवस में दुनिया भर के मासूम लोग तिल-तिल कर पिस रहे हैं। आसमान से आग बरस रही है और...

होली के दो रंग

दुनिया में होली शायद एकमात्र ऐसा त्योहार है जिसकी तैयारी में नहाना कतई ज़रूरी नहीं है। बल्कि यूँ कहें कि होली के लिए तैयार होते समय नहाना निषेध है। अन्य त्योहारों की तरह इस दिन नए-नए नहीं, पुराने-पुराने कपड़े पहने जाते हैं। छेदवाली बनियान पर घिसे हुए परिधान पहनकर सजे हुए लड़कों की टोलियाँ सड़कों...

मेरा रिश्तेदार रातोंरात अम्बानी हो गया

भारत में इन दिनों शादियों का सीज़न चल रहा है। हमारे यहां शादी एक ईवेंट भर नहीं बल्कि बाकायदा एक बोर्ड परीक्षा है, जिसमें आपकी कमर से लेकर आपकी प्लेट और आपका धैर्य तक सब नप जाता है। सबसे अलग कार्ड बनाने के चक्कर में शादियों के कार्ड में इतनी क्रिएटिविटी घुसेड़ दी जाती है कि जिस इन्फॉर्मेषन के लिए...

सोना लई जा रे, चांदी दई जा रे

लो जी, बाज़ार में भी स्त्रीलिंग चांदी ने पुल्लिंग सोने की मोनोपॉली पर धावा बोल दिया है। अब खरे सोने की सामने टंच चांदी अकड़ कर चलने लगी है। मैं तो उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ जब भतीजे के ब्याह से विदा होते समय बुआजी, मुँह बिचकाते हुए कहेंगी- ‘भाभी ने सोने के कंगन में बहका दिया। इकलौती ननद हूँ। एक...

फोकट का लाफ्टर शो

विश्व राजनीति को कॉमेडी शो बनाने की सुपारी लेने वाले पहले नेता हैं डोनाल्ड ट्रंप। उन्हें अपने आप पर विश्वास है कि एक दिन वे नासा के वैज्ञानिकों की फौज भेजकर सूरज को भी उठवा लेंगे। वाशिंग्टन के किसी डुप्लेक्स में उसे नज़रबंद करेंगे। फिर मुँहमांगी क़ीमत पर दुनिया भर में धूप का धंधा करेंगे। शीशियों...

शुभकामनाओं की बाढ़

‘चार पैग व्हिस्की, दो बोतल बीयर, ओ माई डियर, हैप्पी न्यू ईयर’ -बचपन में ग्रीटिंग कार्ड पर इस गोत्र की शायरी लिखी जाती थीं। ‘आपकी सारी प्रॉब्लम होंगी फिक्स, ख़ुशी-ख़ुशी बीतेगा ट्वेंटी ट्वेंटी-सिक्स’; ‘नीचे से निकला आलू, 2026 चालू’ और ‘ऊपर से गिरा बम, 2025 ख़तम’ -इन महान कविताओं से इस बार भी नये साल...

error: Content is protected !!