लपेटे में नेताजी
लगभग पांच साल तक चिराग़ जैन ने न्यूज़ 18 इंडिया के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘लपेटे में नेताजी’ में भाग लिया है। इस कार्यक्रम में समसामयिक विषयों पर राजनैतिक व्यंग्य की पद्य रचनाओं का प्रसारण किया जाता है। इतनी लम्बी अवधि में पैरोडी, हास्य, व्यंग्य, छंदमुक्त तथा मुक्तछंद की रचनाओं के अतिरिक्त घनाक्षरी, सवैये तथा गीत आदि की खूब सर्जना हुई।
यद्यपि इन सब रचनाओं का आधार तात्कालिक घटनाएं हैं, तथापि इनमें साहित्य का सर्वदा अभाव नहीं है। इन सभी रचनाओं को हमने किसी पुस्तक के रूप में संकलित करने का मन बनाया है। उन सभी रचनाओं को इस खंड में पाठक पढ़ सकते हैं। ये सभी रचनाएं एक क्रम में लगाने पर पद्यात्मक इतिहास का सा चेहरा बना लेती हैं।
अनुक्रम
ईद के अवसर पर कश्मीर में सेना पर प्रतिबंध
सुना है एक मदमस्त हाथी ने बिल्ली के कहने पर शेरों के हाथ बांध दिए ताकि भेड़िये मेमनों की दावत उड़ा कर ईद मना सकें। शेरों को आदेश है कि लकड़बग्घे उन्हें अपमानित करें तो हो लें क्योंकि बेचारे लकड़बग्घों का रमज़ान है उनसे अपमानित हो लोगे तो बेचारे ख़ुश हो जाएंगे। ✍️ चिराग़...
तूफान
मोदी जी की लहर चल रही, योगी की आंधी आई भूचालों की धमकी लेकर घूम रहे राहुल भाई बिना बात के उठा बवंडर देते हैं हातिमताई ये सब देखा तो तूफ़ां की ईगो भी कुछ टकराई राजनीति ने आफत मचा ली, सुनामी उठा ली तूफान हुआ तंग भाइयो पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी हैं अब ठाली ये ठीक नहीं ढंग भाइयो हमने तूफान को सचिन...
ज़माना हुआ तंग
पिछला भी सप्ताह महज कानों कानों में बीत गया कर्नाटक के नाटक में और हंगामों में बीत गया सोनम की शादी के कुछ फिल्मी गानों में बीत गया जिन्ना से जो वक़्त बचा था, तूफानों में बीत गया कभी रैली में खिल्ली उड़ा ली, या खेला गाली गाली ज़माना हुआ दंग भाइयो डाँट डपट कर लोकतंत्र में लोग नहीं पाले जाते गुंडागर्दी...
ज़माना हुआ तंग भाइयो
त्रिपुरा में इक विप्लव अपनी सारी मर्यादा भूला मोदी जी ने शी के संग फिर चाइना में झूला झूला लालक़िले पर डालमिया के कब्ज़े का हल्ला-गुल्ला राहुल को चैलेंज किया है पीएम ने खुल्लमखुल्ला येदुरप्पा ने बुकिंग भी करा ली, शपथ रट डाली कर्नाटक की है जंग भाइयो पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली ज़माना हुआ...
पूरी राजनीति हो गई मवाली
इस सप्ताह ख़बर पढ़ने वालों के दिल पर घाव हुआ एक तरफ़ कठुआ घायल है, एक तरफ़ उन्नाव हुआ एनकाउंटर से बच जाने का खुल्लमखुल्ला भाव हुआ तोगड़िया की गद्दी छिन गई, ऐसा गुपचुप दांव हुआ फिर से भागवत ने रामधुन गा ली, मंदिर की याद आ ली वही पुराना ढंग भाइयो पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली ज़माना हुआ तंग...
छप्पन इंची
अपमानित होना पड़ता सैनिक के खून पसीने को रोक नहीं पाए हैं अब तक उग्रवाद के कीने को आईएसआईएस ने मरहूम किया बेटों के जीने को शहद लगाकर चाटेंगे क्या छप्पन इंची सीने को ✍️ चिराग़...
सारी उम्र जाम में
दादाजी की राम-राम में बीत गई बाबूजी की काम-धाम में बीत गई हमें तेज़ रफ़्तार सुहाई शहरों की फिर भी सारी उम्र जाम में बीत गई ✍️ चिराग़...
पूरी राजनीति हो गई मवाली
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब जाली हैं होली के रंग रसिया एक-दूसरे को मार मार ताली, सुनावें रोज़ गाली ये ठीक नहीं ढंग रसिया अभी चाय का शोर थमा था, तभी पकौड़ा आ पहुंचा देसी गदहे नहीं चले तो, अरबी घोड़ा आ पहुंचा नरसिम्हा से मुक्त हुए तो देवेगौड़ा आ पहुंचा पहला पकड़ा नहीं गया था, नया भगौड़ा आ पहुंचा...
बेरोज़गारी का उपाय
यौवन के हाथ करछी-कड़ाही में घिरे तो सीमाओं पे शत्रुओं के बान कौन थामेगा चटनी के स्वाद चखने लगी जवानी गर बैरियों की तिरछी जुबान कौन थामेगा जनता के दुःख देखकर जब धरती पे फटने लगेगा आसमान; कौन थामेगा देश के युवा यदि पकौड़े बेचने लगे तो देश के विकास की कमान कौन थामेगा ✍️ चिराग़...
चुनाव तंत्र
एक दल बोलता है हमको थमा दो देश हम लोकतंत्र की ज़मीन बेच देते हैं एक दल बोलता है हमको थमा दो देश जनता का धर्म और दीन बेच देते हैं एक नेता बोला हम बन के मुंगेरी लाल जनता को सपने हसीन बेच देते हैं जनता ने कहा हम वायदों की बीन पर काले कोबरा को आस्तीन बेच देते हैं ✍️ चिराग़...