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शब्दों की कुंजगलियाँ

‘ललित निबंध’ साहित्य की महत्वपूर्ण विधा है। वर्तमान में यह विधा विलुप्त सी होती जा रही है। लेकिन चिराग़ जैन ने अनेक ललित निबंध लिखे हैं। जीवन के एक अलग पक्ष को खूबसूरती से बयां करते ये निबंध आपको ज्ञान ही नहीं, आनंद भी देंगे। ‘शब्दों की कुंजगलियां’ शीर्षक से इन निबंधों को एक पुस्तक में संकलित किया जा रहा है। यह पुस्तक अभी प्रकाशनाधीन है।

अनुक्रम

ओशो कम्यून की पहली शर्त

ख़ुद से मिलने की ख़ुशी क्या होती है, इसका एहसास मुझे तब हुआ जब मैंने कम्यून में प्रवेश किया। हर चेहरे पर एक नैसर्गिक प्रसन्नता, हर आँख में एक प्राकृतिक चमक, हर पाँव में एक अनायास थिरक ...उत्सव वहाँ आयोजित नहीं, घटित हो रहा था। वहाँ सब अपने पूरे अस्तित्व के साथ घूम रहे थे। वहाँ सब अपने पूरे...

साहित्य बर्बरीक है

साहित्य करुणा से उपजता है। साहित्य संवेदना से जन्म लेता है। 'आह से उपजा होगा गान' -यही 'आह' साहित्य की सर्जना का बीज है। यही कारण है कि साहित्य सदैव कमज़ोर की आवाज़ बनता है। साहित्य की समाज में वही भूमिका है, जो महाभारत के युद्ध में बर्बरीक की थी। वह न पाण्डवों के पीछे खड़ा है, न ही कौरवों के...

हनुमान : भक्त से मित्र हो जाने की यात्रा

अगाध समर्पण का साकार रूप हैं हनुमान। निस्पृह भक्ति का शाश्वत उदाहरण हैं हनुमान। श्रीमत् हनुमान की वीरता अन्य किसी भी वीर की वीरता से इसलिए विशेष है, क्योंकि हनुमान की वीरता समर्पण से उत्पन्न हुई है। श्रीराम के प्रति वीरवर हनुमान का जो समर्पित प्रेम था, उसी की कुक्षि से यह भाव उपजा कि चाहे...

नवरात्रि और स्त्री

चैत्र मास की नवरात्रि मनुष्य जाति में प्रचलित सर्वाधिक विशेष उत्सवों में एक हैं। स्त्री मन की नौ अलग-अलग दशाओं की आराधना ही नहीं अपितु साधना तक की परंपरा का विधान है इस पर्व में। और थोड़ा सा ध्यान से देखें तो देवी के इन नौ रूपों में काव्य के नौ रस भी सहज ही दिखाई दे जाएंगे। अर्थात्‌ देवी के ये नौ...

पतझर का मौसम

कई बार मैंने महसूस किया है कि पतझर का मौसम अन्य किसी भी मौसम से अधिक कवित्व भरा होता है। ऊँचे दरख्तों से सहसा झरते पीले पत्ते मन में अव्यक्त सी रूमानियत भर जाते हैं। डालियाँ थोड़ी खाली ज़रूर होती हैं लेकिन उन्हें बेनूर नहीं कहा जा सकता। झरते हुए पत्ते सड़कों का सिंगार करने लगते हैं। किसी बाग की...

कविता और सत्ता

पौराणिक सन्दर्भों से लेकर आज तक गुरुकुल और कविता ने सत्ता का निर्देशन किया है। चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त हो या सिकंदर सरीखा विश्वविजेता; सभी ने गुरुकुल की तर्जनी का सम्मान किया है। यह व्यवस्था इसलिए भी अपरिहार्य है कि सत्ता जनभावना से सीधे संपर्क में नहीं रह पाती। अवसरवादी चाटुकार सत्ता को...

अमर पंक्तियों का व्याकरण

किसी पंक्ति में ऐसा क्या विशेष होता है कि वह अचानक युगजयी हो जाती है! हज़ारों-लाखों लोगों ने पूरा-पूरा जीवन लगा दिया काव्य रचने में, लेकिन पूरी दुनिया में उंगली पर गिने जाने योग्य कविताएँ ही अमर हुई हैं। और जो अमर हुई हैं उन पंक्तियों के शब्द शिल्प में कुछ असाधारण दिखाई भी नहीं देता। उनसे बेहतर...

आस्था का अपमान

जो आस्था न तोड़ सका उसने मन्दिर तोड़े और जो विचार को न मिटा सका वह किताबें जलाने लगा। लेकिन यह कृत्य वीरता का नहीं, अपितु स्वयं के परास्त होने की घोषणा है। अभिमन्यु की हत्या करके कौरवों ने पाण्डवों को आतंकित नहीं किया था अपितु आश्वस्ति प्रदान की थी कि कौरवों का नैतिक बल समाप्त हो गया है। जब तर्क...

वसन्त का मौसम

सर्द हवाओं के प्रकोप से निकलकर, देह जब मंद समीर के स्पर्श से खिल उठती है; तब वसंत घटित होता है। कोहरे की सत्ता में दबी-दुबकी धरती जब रश्मियों के गुनगुने स्पर्श से रोमांचित हो उठती है; तब वसंत घटित होता है। जाड़े का ऊनी बोझा छोड़कर जब बदन, सरसों का तेल मलकर धूप सेंकते हुए मीठी नींद में गोते लगाता...

डॉ विष्णु सक्सेना

बात उस दौर की है, जब हिन्दी कवि सम्मेलनों के समापन काव्य पाठ की डोर पर से गीतकारों की गिरफ्त ढीली पड़ रही थी। राजनैतिक परिप्रेक्ष्य और सामरिक परिदृश्य ने तनाव इतना बढ़ा दिया था कि मंच के एक कोने में बैठने वाला हास्य-कवि जनता को आकृष्ट करने लगा था। कवि सम्मेलन बदलकर 'हास्य कवि सम्मेलन' होने लगे थे।...

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