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शब्दों की कुंजगलियाँ

‘ललित निबंध’ साहित्य की महत्वपूर्ण विधा है। वर्तमान में यह विधा विलुप्त सी होती जा रही है। लेकिन चिराग़ जैन ने अनेक ललित निबंध लिखे हैं। जीवन के एक अलग पक्ष को खूबसूरती से बयां करते ये निबंध आपको ज्ञान ही नहीं, आनंद भी देंगे। ‘शब्दों की कुंजगलियां’ शीर्षक से इन निबंधों को एक पुस्तक में संकलित किया जा रहा है। यह पुस्तक अभी प्रकाशनाधीन है।

अनुक्रम

सारे जहाँ से अच्छा

अद्भुत है ये देश। ढेर सारी कमियों के बावजूद सबसे अच्छा। राजनैतिक विसंगतियों के तमाम झरोखों में से जब संस्कृति की रौशनी झांकती है तो इस मिट्टी की जड़ों का एहसास सीने को चौड़ा कर देता है। साम्प्रदायिकता की आग पर स्वार्थ कीरोटियाँ सेंकने वाले चाहें तो सीख सकते हैं कि ईद पर सेवइयाँ बेचने वाला बाबा...

चाँद को नहीं पता

कहीं भी तो अंतर नहीं है यार! चांद को नहीं पता कि उसे देखकर कोई रोज़ा, ईद की ख़ुशी में तब्दील होगा या कोई उपवास, महाशिवरात्रि के उल्लास का रूप धरेगा। गाय को भी नहीं पता कि उसके थनों में जो धार उतरी है, वो सेवइयों की मिठास में घुलेगी या शिवलिंग पर ढलक कर पावन होवेगी। यहाँ तक कि सड़क किनारे पट्टा...

भारत में नागर विमानन के सौ वर्ष

प्राप्य से इतर अप्राप्य की ओर आकर्षित होना मनुष्य का सहज स्वभाव है। इसी तथ्य के परिप्रेक्ष्य से यह स्पष्ट होता है कि धरती पर चलने के अपने नैसर्गिक गुण में किसी प्रकार का विकास करने से अधिक उर्जा मानव ने तैरना और उड़ना सीखने में व्यय की। महत्वाकांक्षाओं के झरोखों से जब मानव का आदिम स्वरूप मछलियों को...

पटनीटाॅप : मुहब्बत के नशे में लिखी गई कविता

जम्मू आये हुए मुझे छह महीने बीत गये हैं, गर्मी की जनता एक्सप्रेस जा चुकी है और सर्दी की राजधानी एक्सप्रेस आउटर सिग्नल पर खड़ी है। इस खूबसूरत मौसम में अचानक पटनीटॉप जाने का कार्यक्रम बन गया। दोपहर करीब तीन बजे जम्मू से रवाना हुआ। जम्मू शहर पार करते ही वादियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया। पहली बार...

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