+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

लपेटे में नेताजी

लगभग पांच साल तक चिराग़ जैन ने न्यूज़ 18 इंडिया के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘लपेटे में नेताजी’ में भाग लिया है। इस कार्यक्रम में समसामयिक विषयों पर राजनैतिक व्यंग्य की पद्य रचनाओं का प्रसारण किया जाता है। इतनी लम्बी अवधि में पैरोडी, हास्य, व्यंग्य, छंदमुक्त तथा मुक्तछंद की रचनाओं के अतिरिक्त घनाक्षरी, सवैये तथा गीत आदि की खूब सर्जना हुई।
यद्यपि इन सब रचनाओं का आधार तात्कालिक घटनाएं हैं, तथापि इनमें साहित्य का सर्वदा अभाव नहीं है। इन सभी रचनाओं को हमने किसी पुस्तक के रूप में संकलित करने का मन बनाया है। उन सभी रचनाओं को इस खंड में पाठक पढ़ सकते हैं। ये सभी रचनाएं एक क्रम में लगाने पर पद्यात्मक इतिहास का सा चेहरा बना लेती हैं।

अनुक्रम

चुनाव आ गए

अभी सबके ही पत्ते खुलेंगे कि देश में चुनाव आ गए सारे नेता सड़क पर मिलेंगे कि देश में चुनाव आ गए पहला युद्ध टिकट बँटने का हर दल के भीतर होगा दलबदलू मौका ढूंढेंगे, किस दल में बेहतर होगा भाषण, रैली, वादे, गाली, पग-पग ये मंज़र होगा टोपी और किसी की होगी, और किसी का सर होगा अब तो पानी में पत्थर घुलेंगे कि...

रामजी के काम का लिहाज

बिन बात आप जाने कैसे हो गए नाराज़ रामजी के काम का लिहाज भी नहीं रहा वक़्त का स्वभाव बड़ा बेवफ़ा-सा है हुजूर हमेशा किसी का परवाज़ भी नहीं रहा रावण का दंभ धूल में मिला है बार बार घर भी न रहा, राजकाज भी नहीं रहा सच से नहीं है कोई नाता राजनीति का जी कल भी नहीं था और आज भी नहीं रहा ✍️ चिराग़ जैन Ref :...

अटल बिहारी वाजपेयी जी के महाप्रयाण पर

भारत का योग्य सपूत गया मानवता का अवधूत गया नैतिकता का क़िरदार गया हिम्मत का लम्बरदार गया संसद का उन्नत भाल गया भारत माता का लाल गया इक अद्भुत इच्छाशक्ति गई सद्भावों की अनुरक्ति गई जनहित का अथक प्रयत्न गया भारत का अनुपम रत्न गया दुनिया से बाज़ी मार गया युग "अटल सत्य" से हार गया धरती रोई, अम्बर रोया...

इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने पर

पाक की सियासत क़माल की सियासत है सबकी बनाती है ये रेल, चले जाओगे फाँसी, गोली, क़ैद, सज़ा यही मिलता है बस निकलेगा आपका भी तेल चले जाओगे खेल-खिलवाड़ नहीं ज़िन्दगी का दांव है ये कस ली है नाक में नकेल चले जाओगे कुछ रोज़ महलों का रंग ढंग देख लो जी बाद में तो आप ख़ुद जेल चले जाओगे भारत के वीर सैनिकों से सामना...

कई पीढ़ियाँ बीत गई हैं

सूरज आग उगलता हो सिर पर मेघ मचलता हो भीषण कोहरा पड़ता हो अम्बर दिन भर जलता हो हर मुश्किल को झेल गए हम मेहनत की तलवार से हमें कष्ट होता है केवल शासन के व्यवहार से मिट्टी सख्त हुई तो हम भी कंधे पर हल धर लाए नाखूनों से नहर काट कर खेतों तक कलकल लाए ओले बरसे नहीं हटे पारा उछला वहीं डटे आंधी आई अड़े रहे...

छप्पन इंची

अपमानित होना पड़ता सैनिक के खून पसीने को रोक नहीं पाए हैं अब तक उग्रवाद के कीने को आईएसआईएस ने मरहूम किया बेटों के जीने को शहद लगाकर चाटेंगे क्या छप्पन इंची सीने को ✍️ चिराग़...

सारी उम्र जाम में

दादाजी की राम-राम में बीत गई बाबूजी की काम-धाम में बीत गई हमें तेज़ रफ़्तार सुहाई शहरों की फिर भी सारी उम्र जाम में बीत गई ✍️ चिराग़...

पूरी राजनीति हो गई मवाली

पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब जाली हैं होली के रंग रसिया एक-दूसरे को मार मार ताली, सुनावें रोज़ गाली ये ठीक नहीं ढंग रसिया अभी चाय का शोर थमा था, तभी पकौड़ा आ पहुंचा देसी गदहे नहीं चले तो, अरबी घोड़ा आ पहुंचा नरसिम्हा से मुक्त हुए तो देवेगौड़ा आ पहुंचा पहला पकड़ा नहीं गया था, नया भगौड़ा आ पहुंचा...

बेरोज़गारी का उपाय

यौवन के हाथ करछी-कड़ाही में घिरे तो सीमाओं पे शत्रुओं के बान कौन थामेगा चटनी के स्वाद चखने लगी जवानी गर बैरियों की तिरछी जुबान कौन थामेगा जनता के दुःख देखकर जब धरती पे फटने लगेगा आसमान; कौन थामेगा देश के युवा यदि पकौड़े बेचने लगे तो देश के विकास की कमान कौन थामेगा ✍️ चिराग़...

error: Content is protected !!