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लपेटे में नेताजी

लगभग पांच साल तक चिराग़ जैन ने न्यूज़ 18 इंडिया के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘लपेटे में नेताजी’ में भाग लिया है। इस कार्यक्रम में समसामयिक विषयों पर राजनैतिक व्यंग्य की पद्य रचनाओं का प्रसारण किया जाता है। इतनी लम्बी अवधि में पैरोडी, हास्य, व्यंग्य, छंदमुक्त तथा मुक्तछंद की रचनाओं के अतिरिक्त घनाक्षरी, सवैये तथा गीत आदि की खूब सर्जना हुई।
यद्यपि इन सब रचनाओं का आधार तात्कालिक घटनाएं हैं, तथापि इनमें साहित्य का सर्वदा अभाव नहीं है। इन सभी रचनाओं को हमने किसी पुस्तक के रूप में संकलित करने का मन बनाया है। उन सभी रचनाओं को इस खंड में पाठक पढ़ सकते हैं। ये सभी रचनाएं एक क्रम में लगाने पर पद्यात्मक इतिहास का सा चेहरा बना लेती हैं।

अनुक्रम

ओ कोरोना

ओ कोरोना हम पर पहले ही है काफ़ी रोना-धोना तुम जीवन दुश्वार करो ना! तुमको क्या लगता है, क्यों बे हम खाँसी से डर जाएंगे ऐसी खाँसी करने वाले तो भारत में सीएम बने फिरा करते हैं हाथ मिलाने से बढ़ते हो ताप बढ़े तो मर जाते हो भारत में टेम्प्रेचर अड़तालीस डिग्री तक चढ़ जाता है राख तलक भी नहीं मिलेगी राजनीति के...

सोशल मीडिया से दुःखी

पीएम ने कहा है कि वे सोशल मीडिया से दुःखी हो गए हैं। और यह बात भी उन्होंने सोशल मीडिया से ही बताई. ✍️ चिराग़ जैन

सच और विकास के बीच दीवार

एक वर्ग है जो दीवार के पीछे बनी झुग्गियों पर प्रश्न पूछना चाहता है। दूसरा वर्ग है, जो झुग्गियों के आगे बनी दीवार को विकास समझ कर झुग्गी के प्रश्न पूछने वालों को राष्ट्रद्रोही कह रहा है। ✍️ चिराग़ जैन Ref : Donald Trump's India...

दिल्ली के चुनाव परिणाम

चुनाव आयोग इस बात पर एक्शन ले कि केजरीवाल ने यह बात छुपाए रखी कि मुहल्ला क्लीनिकों में बीजेपी का इलाज किया जा रहा है झाड़ू को धुआँदार सफ़ाई की बधाई कमल को कुछ नई पाँखुरियाँ खुलने की बधाई और हाथ को हाथ न हिलाने की बधाई ✍️ चिराग़ जैन Ref : Delhi Election...

कश्मीर विलय

बड़बोलों को भी तो समझा लो नकेल कोई डालो इन्हें भी ज़रा टोक दीजिये कोढ़ मिटा है लेकिन मद में बिल्कुल फूल नहीं जाना जिसमें घृणा पढ़ाई जाए, उस स्कूल नहीं जाना जश्न मनाना लेकिन हरगिज़ आउट ऑफ रूल नहीं जाना उनकी इज़्ज़त, अपनी इज़्ज़त, इसको भूल नहीं जाना अपने मन को भी कुछ तो खंगालो घृणा है तो मिटा लो प्यासों को...

वाइको

कांग्रेसवाले कैसे-कैसे पीस ले के आए कटपीस हो के चिन्दी-चिन्दी पे फँसा दिया कभी तो किसी ने आलू-सोने से बिगाड़ा खेल कभी नारियल, कभी भिंडी पे फँसा दिया कभी चायवाला कहा और कप धोने पड़े निंदा पे फँसाया कभी निंदी पे फँसा दिया पहले ही बोलती थी बन्द कांग्रेसियों की और अब वाइको ने हिंदी पे फँसा दिया ✍️ चिराग़...

कर्नाटक चुनाव

कर्नाटक के इस नाटक का पर्दा गिरनेवाला है ख़बरों में चर्चा है उनका गुडलक फिरनेवाला है चाल चली जो बीजेपी ने उसके पासे ठीक पड़े सत्ता में बैठे साथी ही बाग़ी बनकर चीख पड़े गुपचुप गुपचुप खिचड़ी पक गई, उनके साथी टूट गए फ्लोर टेस्ट में इज़्ज़त लुट गई, और पसीने छूट गए जेडीएस की कुर्सी पर अब संकट घिरनेवाला है...

संघ की जासूसी

ये नीतीशवा करे है कानाफूसी करावे जासूसी मोदी जी इनका साथ छोड़ दो इनके तेवर में भर दो ज़रा भूसी कि छोड़ो कंजूसी सत्ता की शह-मात छोड़ दो आर एस एस पर और विहिप पर नज़रें इनकी पैनी हैं हम हैं मौन तुम्हारी ख़ातिर उनके हाथों छैनी हैं हमें बता दो आख़िर कब तक गुंडागर्दी सहनी है संघ लुटा तो बीजेपी की लाज कहाँ फिर...

पाकिस्तान की हेकड़ी

देखो हेकड़ी निकाल दई सारी पड़ोस की बीमारी तुम्हारा सत्यानाश हो गया कैसी चौड़े में आरती उतारी ओ साँपों की पिटारी खुले में पर्दाफ़ाश हो गया भारत की हर इक कोशिश को तुमने जी भर कोसा था बद का अंत बुरा होता है, तुमको नहीं भरोसा था हम कहते थे रूमाली थी, तुम कहते थे डोसा था उस हाफ़िज़ को क़ैद किया है, जिसको पाला...

जनसंख्या

सैंया पूछने लगी है सरकार कलैण्डर कब तक छापोगे अब संभालने दो मोहे घर बार कलैंडर कब तक छापोगे कमरों की हालत ख़स्ता है आंगन पड़ गया छोटा चौका बोला हो जावेगा दो रोटी का टोटा मेरी देह भी करे है इनकार कलैंडर कब तक छापोगे संसाधन नाराज़ हुए हैं रूठी हैं सुविधाएँ कहीं हमारी लापरवाही भारी ना पड़ जाएँ छिन जाएंगे...

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