+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

लपेटे में नेताजी

लगभग पांच साल तक चिराग़ जैन ने न्यूज़ 18 इंडिया के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘लपेटे में नेताजी’ में भाग लिया है। इस कार्यक्रम में समसामयिक विषयों पर राजनैतिक व्यंग्य की पद्य रचनाओं का प्रसारण किया जाता है। इतनी लम्बी अवधि में पैरोडी, हास्य, व्यंग्य, छंदमुक्त तथा मुक्तछंद की रचनाओं के अतिरिक्त घनाक्षरी, सवैये तथा गीत आदि की खूब सर्जना हुई।
यद्यपि इन सब रचनाओं का आधार तात्कालिक घटनाएं हैं, तथापि इनमें साहित्य का सर्वदा अभाव नहीं है। इन सभी रचनाओं को हमने किसी पुस्तक के रूप में संकलित करने का मन बनाया है। उन सभी रचनाओं को इस खंड में पाठक पढ़ सकते हैं। ये सभी रचनाएं एक क्रम में लगाने पर पद्यात्मक इतिहास का सा चेहरा बना लेती हैं।

अनुक्रम

सफ़ाई अभियान

बेकार की बात है श्रीमान मोदी जी को क्या पता किसे कहते हैं सफ़ाई अभियान सफ़ाई अभियान के प्रति, सबसे ज़्यादा गंभीर हैं हमारे देश के पति। जिन्हें घर में घुसने से पहले साफ़ करनी पड़ती है मोबाइल की कॉल डिटेल, कम्प्यूटर छोड़ने से पहले साफ़-सुथरी बनानी पड़ती है अपनी ई-मेल। अरे साहब झाड़ू उठाकर सफ़ाई करने को हम बड़ा...

देश का कल्याण

एक बार मुलायम सिंह यादव और मायावती एक संत के पास एक साथ पहुंचे। संत धर्मसंकट में फंस गए। किसे क्या आशीर्वाद दें। फाइनली उन्होंने दोनों को आशीर्वाद दिया- देश का कल्याण करो। परिणामस्वरूप दोनों हार गए। कल्याण सिंह जीत गए। ✍️ चिराग़...

अलविदा 2012

अबे 2012! तेरे जैसा साल न आए दोबारा। तूने तो पूरा देश ही निपटा मारा सबसे पहले तो छीना कुश्ती का सितारा एक्टिंग का किंग यानि दारा सिंह अभी दारा की याद को भूले भी नहीं थे अख़बार तब तक हमें अलविदा कह गए राजेश खन्ना यानि पहले सुपरस्टार फिर लगते रहे एक के बाद एक घाव मुम्बई में विलासराव उसके बाद ए के...

सरकारी स्कूलों के बच्चों में संस्कार

श्री श्री रविशंकर ने बयान दिया है कि ”सरकारी स्कूलों के बच्चों में संस्कार नहीं होते।“ सुनकर लगा कि श्री श्री को अपनी खी-खी करवाने का चाव चढ़ा है। उनको कोई समझाये कि सरकारी स्कूलों में तो बच्चे ही नहीं होते। उन टीन वाले कमरों में ‘बाप’ पढ़ते हैं। अमीरी की चम्मच मुँह में दबाए जन्मने वाले लाटसाहबों को...

अन्ना आंदोलन

आज मैंने एक ग़ज़ब का नज़ारा देखा मैंने देखा एक होड़ सी लगी थी बारिश के जज़्बे से लोगों के जज़्बे की। झमाझम बरसात में दिल्ली की सड़कें उफ़न आईं थीं लोगों के हुज़ूम से। किसी को कोई डर ही नहीं था बीमार पड़ने का क्योकि वे सब आए थे देश की महामारी का इलाज़ करने। जहाँ तक निगाह जाती थी सिर ही सिर नज़र आते थे। …आज...

error: Content is protected !!