लपेटे में नेताजी
लगभग पांच साल तक चिराग़ जैन ने न्यूज़ 18 इंडिया के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘लपेटे में नेताजी’ में भाग लिया है। इस कार्यक्रम में समसामयिक विषयों पर राजनैतिक व्यंग्य की पद्य रचनाओं का प्रसारण किया जाता है। इतनी लम्बी अवधि में पैरोडी, हास्य, व्यंग्य, छंदमुक्त तथा मुक्तछंद की रचनाओं के अतिरिक्त घनाक्षरी, सवैये तथा गीत आदि की खूब सर्जना हुई।
यद्यपि इन सब रचनाओं का आधार तात्कालिक घटनाएं हैं, तथापि इनमें साहित्य का सर्वदा अभाव नहीं है। इन सभी रचनाओं को हमने किसी पुस्तक के रूप में संकलित करने का मन बनाया है। उन सभी रचनाओं को इस खंड में पाठक पढ़ सकते हैं। ये सभी रचनाएं एक क्रम में लगाने पर पद्यात्मक इतिहास का सा चेहरा बना लेती हैं।
अनुक्रम
विज्ञापन से पता चला
विज्ञापन से पता चला कि खली की अपनी बॉडी से उनका अपना घर टूट गया। उनको अपने अवार्ड वापस कर देने चाहिए थे। लेकिन उन्होंने अवॉर्ड वापस करने की बजाय अपनी मौसी से सलाह ली। अब वो अम्बुजा सीमेंट से घर बणवा के आराम से रह रहे हैं। मुझे समझ नहीं आता कि इन सब पुरस्कार विजेताओं की कोई मौसी क्यों नहीं है। ✍️...
मार्च फॉर इण्डिया
राहुल गांधी ने मम्मी से पूछा है- "मम्मी मम्मी! बीजेपी 'मार्च फॉर इण्डिया' कर रही है तो आप 'अप्रैल फॉर इटली' क्यों नहीं करती?" मम्मी माथा ठोकते हुए बोली- "मार्च-अप्रैल का तो पता नहीं पर तू एक दिन 'श्राद्ध फॉर कांग्रेस' ज़रूर करेगा।" ✍️ चिराग़...
अच्छे दिन आनेवाले हैं
"अच्छे दिन आनेवाले हैं" का पर्यायवाची वाक्य आज मथुरा में गूँजा "बुरे दिन चले गए हैं। अब कहीं विपक्षी ये न कह दें कि "देख लो जी; आया कुछ भी नहीं, जो था वो भी चला गया।" ✍️ चिराग़...
पेट्रोल के दाम
राहुल गांधी से किसी ने पूछा : सरकार ने पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए, इस पर आपकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई? राहुल गांधी : आपको क्या लगता है कि मैं पदयात्रा किसानों के लिए कर रहा हूँ? ✍️ चिराग़...
नेपाल भूकंप त्रासदी
ईश्वर के एक इशारे पर मानवता दहल गई सारी लेकिन मानव की जिजीविषा पल भर भी हिम्मत कब हारी धरती डोली, हड़कंप मचा ईश्वर ने यह भूकंप रचा भय, शोक, करुण-चीखें, पुकार मानव मन काँपा बार-बार क्षण भर में भीषण वज्रपात धन-जन हानि और प्राणघात लेकिन अगले ही पल मानव भरकर भीषण हुंकार उठा जो चला गया उसको तजकर कर जीवन...
दिल्ली का चुनाव
दिल्ली का चुनाव चुनाव नहीं बबाल था एक तरफ़ पूरी बीजेपी थी एक तरफ़ केजरीवाल था। बीजेपी ने अपने रास्ते में पहली खाई तब खोदी जब दिल्ली जैसे छोटे चुनाव के लिये रामलीला मैदान से दहाड़े थे पीएम मोदी। और जीती हुई बाज़ी विरोधियों के हाथ में तब देदी जब सबके मना करने के बावज़ूद छाँट कर लाए अपनी बुआ, बेदी। इस...
पेशावर की चीख़
ढेर सा है स्कूल के इक रूम में बच्चों के बस्तों का और उन बस्तों के बच्चों का! धूल में लथपथ कोई आदिल कभी जब स्कूल से घर लौटता था तो वो अम्मी की ढेरों गालियों से होके कमरे तक पहुँचता था आज वो आँगन में है और खून से लथपथ मगर अम्मी के होंठों से कोई अल्फाज़ गिरता ही नहीं है। उसे कुछ बोल दे अम्मी तो वो...
अल्लाह हमारे साथ है
जेहादियों ने कहा- "अल्लाह हमारे साथ है" बच्चों ने कहा- "अल्लाह हमारे साथ है" फिर ज़ेहादियों की बंदूकों ने सैंकड़ों मासूम मौत के घाट उतार दिए फिर ज़ेहादी ख़ुद को शहीद मानकर अल्लाह के पास गए वहाँ अल्लाह नहीं मिला उसका लहूलुहान जिस्म मिला उसके जिस्म में गोलियाँ लगी थीं ...जेहादियों की। ✍️ चिराग़...
दिल्ली चुनाव 2014
आडवाणी जी से बोले मोदी न निराश रहो चार-पाँच साल की है बात चला जाऊँगा जब मेरे शाह के वज़ीर हार मान लेंगे आपको ही सौंप के बिसात चला जाऊँगा वोट देने वाले सब लोग टापते रहेंगे कर के मैं बड़ी-बड़ी बात चला जाऊँगा भाजपाई सोचें उन्हें काशी जाना है कि काबा मेरा क्या है मैं तो गुजरात चला जाऊँगा दिल्ली के सीएम...
अब कुछ सफ़ाई हो
जानते हैं मोदी जी के स्वच्छता अभियान की गाड़ी पिक-अप क्यों नहीं ले रही क्योंकि जिस देश में कभी दूध की नदियाँ बहती थीं वहाँ दूध की थैलियाँ नदियों को बहने नहीं दे रही। शहरों से गाँवों तक मस्तक से पाँवों तक मेलों से ठेलों तक रेलों से जेलों तक खेलों से झूलों तक कॉलेज से स्कूलों तक फ़िल्मों से चैनल तक...