कोहरा घना है
‘कोहरा घना है’ शीर्षक से तैयार की जा रही यह पुस्तक, चिराग़ जैन के उन व्यंग्य-लेखों का संग्रह है जो समसामयिक घटनाओं पर लिखे गए हैं। लोकतंत्र, राजनीति तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े इन व्यंग्य-लेखों में हास्य से अधिक चुटीले कटाक्ष का रंग देखने को मिलता है। यह पुस्तक फिलहाल प्रकाशनाधीन है।
अनुक्रम
पवनपुत्रियों की लंकायात्रा
कहते हैं इतिहास स्वयं को दोहराता है, लेकिन पिछले दिनों विद्वानों की इस चिर-परिचित सूक्ति को ताक पर रखकर, आध्यात्म ने स्वयं को दोहरा दिया। आध्यात्म की इस उद्दण्डता पर सारा साहित्य-जगत सकते में है। हुआ यूं कि जम्बूद्वीपे भारतखण्डे दिल्लीनाम्निनगरे पीएमहाउसे (वाल्मिकी रामायण से साभार) दो पवनपुत्रियां...
