+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

कोहरा घना है

‘कोहरा घना है’ शीर्षक से तैयार की जा रही यह पुस्तक, चिराग़ जैन के उन व्यंग्य-लेखों का संग्रह है जो समसामयिक घटनाओं पर लिखे गए हैं। लोकतंत्र, राजनीति तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े इन व्यंग्य-लेखों में हास्य से अधिक चुटीले कटाक्ष का रंग देखने को मिलता है। यह पुस्तक फिलहाल प्रकाशनाधीन है।

अनुक्रम

बच सकते हैं तो बच लें

बधाई हो! एक बार फिर हमें धर्म के कपड़े उतारने का मौक़ा मिला है। इस बार हमाम में हिन्दू धर्म खड़ा है। कीचड़ का एक थेपा कोई हिंदू संतों पर फेंकेगा तो बदले में हिन्दू लोग भर-भर बाल्टी कीचड़ पादरियों और मौलवियों के थोबड़े पर दे मारेंगे। बाबागिरी की आड़ में अय्याशी कर रहा कोई कुकर्मी नंगा हुआ तो हमने सभी...

रामरहीम की गिरफ्तारी

प्रश्न किसी फैसले में हुई पंद्रह साल की देरी का नहीं है। प्रश्न रामरहीम के समर्थकों की गुंडागर्दी का भी नहीं है। और प्रश्न किसी प्रदेश में जनता की संपत्ति को बर्बाद करने का भी नहीं है। इन सब प्रश्नों के तो हम आदी हो चुके हैं। अब सवाल ये है कि जो लोग रामरहीम के समर्थन में इस देश को नेस्तोनाबूद करने...

हत्यारा तंत्र

गोरखपुर मुआमले जैसे महापाप के सूतक की ज़िम्मेदारी एक बार फिर सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली ने ली है। पाकिस्तान में जब स्कूली बच्चों की लाशें बिछीं तो पूरे विश्व ने आतंकवाद से मिलकर लड़ने की शपथ उठाई थी। आज जब हमारे मुल्क में नन्हीं किलकारियों की प्राणवायु तक दफ्तरी छीन ले गए तो इस हिंसक व्यवस्था के...

दिल्ली महापुराण

कलयुग में आपिये और भाजपाइयों के दो समूह थे। दिल्ली नगरी में संसदपुरी और विधानसभापुरी पर शासन करने हेतु दोनों परस्पर दूसरे को असुर और स्वयं को सुर सिद्ध करने में निमग्न रहते थे। मीडिया माइलेज के संघर्ष में वे जनहित तथा राष्ट्रहित के अस्त्र एक-दूसरे पर चलाते रहते थे। इन अस्त्रों के आघात से इनके...

रे बुलंदशहर!

रे बुलंदशहर! इतनी बुलंदी तैने कहाँ से पाई कि अपनी बेटी के बलात्कार को अपनी आँखों से देखने वाले बाप की चीत्कार से तेरा कलेजा नहीं काँपा। उस माँ की चीख तुझे सुनाई नहीं दी जिसे समझ नहीं आ रहा था कि अपनी देह पर लिपटे दरिंदों की आँखें पहले फोडूं या अपनी 13 साल की बेटी के जिस्म पर टूटते दुःशासनों की...

जज साहब की इगो

आज सुबह टेलीविज़न बुलेटिन ने बताया कि एक जज साहब जनता के आक्रोश के शिकार हुए और भीड़ ने उन्हें सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर मारा। मुआमला सिर्फ इतना था कि जज साहब की इगो को इस बात से ठेस पहुंची कि एक ट्रक ड्राईवर ने उनको ओवरटेक करने के लिए साइड नहीं दी। ट्रक ड्राईवर जैसे तुच्छ प्राणी की इस बदतमीज़ी से हिज़...

अपना थूका अपने मुँह

मायावती को अपशब्द कहने वाले दयाशंकर को पार्टी ने रामभरोसे बनाकर छोड़ दिया। दयाशंकर की भाषा निश्चित रूप से अक्षम्य है किन्तु राजनीति में इस परम्परा के निर्वाह में स्वयं मायावती भी अग्रणी रही हैं। जातिवाद और वर्गसंघर्ष की उत्तेजना जिनकी राजनीति का आधार रही है; साथ ही जिन्होंने सार्वजनिक मंच पर "तिलक,...

कला का मुँह काला कर दिया जाए

"कला का मुँह काला कर दिया जाए" -ये हुक्म अपने आप को दिया है कलयुग के कुकर्मियों ने। कोलाहल पर किलोल की विजय न हो जाए। अपनी महत्वाकांक्षाओं को मनोरंजन के सत्य भाषण से बचाने के लिए सियासत रोज़ नए पैंतरे खेल रही है। कोई मुज़फ्फरनगर के दंगों पर बोलने लगे तो उलेमाओं का फ़तवा उछाल दो, कोई पंजाब के सुट्टे...

सेंसर बोर्ड

पहलाज निहलानी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष हैं; इस हेतु उन्हें अपने दायित्व के निर्वाह हेतु सख्त होना पड़ेगा ही। भारत के दर्शकों को अश्लीलता से बचाना, अन्धविश्वास से बचाना उनका दायित्व है और भारत के लोगों अथवा समूहों की भावनाएं आहत न हों; यह देखना उनका काम है। किन्तु चूँकि मैं फिल्मों का आलोचक अथवा...

आग की ख़बर

अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा मीडिया की ख़बरों की भूख किस हद तक इस देश की रीढ़ में दीमक की भूमिका अदा कर रही है; इसका अगला उदाहरण है कन्हैया कुमार। कोई भी शख़्स अराजकता के उदाहरण प्रस्तुत करके सुर्ख़ियाँ बटोरे, राष्ट्रीय अस्मिता की लाश पर पाँव रखकर लाइम लाइट में...

error: Content is protected !!