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एक अदद किरदार

‘एक अदद किरदार’ में चिराग़ जैन की उन गद्य रचनाओं का समावेश है, जो डायरी, संस्मरण तथा आत्मकथात्मक शैली में रची जा रही हैं। संभव है इस शीर्षक तले संकलित सभी रचनाएं अंततः चिराग़ जैन की आत्मकथा के रूप में पाठकों को प्राप्त हों।

अनुक्रम

भारतीय छात्र संसद

10वीं भारतीय छात्र संसद का मंच-संचालन करके आज चार दिन बाद घर लौटा हूँ। 20 फरवरी को सुबह 9ः00 बजे से आज दोपहर 3ः30 बजे तक राजधानी के विज्ञान भवन में देश-विदेश के लगभग 2000 छात्रों ने भारतीय राजनीति की दशा और दिशा पर विस्तृत चर्चा की। देश की विविध समस्याओं पर चिंतन करने के लिए इस छात्र-संसद में जिन...

प्रमोद तिवारी

कितना बोलते थे प्रमोद जी। नॉन स्टॉप। सुननेवाले का सिर दुःखने लगता था लेकिन बोलते-बोलते उनका मुँह नहीं दुःखता था। और अब ऐसी चुप्पी धार ली है कि साँसों तक की आवाज़ नहीं आ रही। एक-एक मंज़र आँखों के सामने तैर रहा है। लालकिले की वीडियो यूट्यूब पर डलवाने के लिए उनकी बेचैनी और मेरी लापरवाही की जुगलबंदी से...

बहुत टॉप रमेश मुस्कान

ज़िन्दगी जीने के एक रवैये का नाम है - 'रमेश मुस्कान'! आडम्बर, झूठ, परिश्रम, महत्वाकांक्षा और औपचारिकता से रहित एक सहज, प्रसन्न, उन्मुक्त और संतुष्ट जीवन का सटीक उदाहरण है रमेश मुस्कान का जीवन। मंच पर जमने और कविता लिखने की कला किसी से भी सीखी जा सकती है लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी तनाव से...

किशन सरोज जी नहीं रहे

ले गया चुनकर कँवल कोई हठी युवराज ताल के शैवाल-सा हिलता रहा मन स्वर्ग का युवराज गीत-सरोवर के सबसे ख़ूबसूरत कँवल को ले चला और गीतों के रसिकों का मन काँपता रह गया। विरह और पीड़ा से परिपूर्ण किशन सरोज जी का कवित्व गीत की सबसे परिष्कृत शब्दावली का साधक था। मेहंदी रचे हाथों से दीप तिरोहित होते देख किशन...

आईआईटी रुड़की का कवि सम्मेलन

आईआईटी रुड़की का कवि सम्मेलन था। सभागार में तिल रखने को जगह नहीं थी। मंच पर डॉ गोविंद व्यास, श्री मनोहर मनोज, श्री अरुण जैमिनी, श्री अंसार कम्बरी और मैं आमंत्रित कवियों के रूप में विराजमान थे। तीन कवि रुड़की स्थानीय कवियों के रूप में मंचासीन थे और दो युवक विद्यार्थी कवियों के रूप में। संचालन प्रारंभ...

शिक्षकों की परछाईं

जब हम शिक्षा ग्रहण कर रहे होते हैं, तब शिक्षकों का ख़ूब उपहास करते हैं। कोई ऐसा शिक्षित न मिलेगा जिसने अपने शिक्षकों के विकृत नामकरण न किये हों। किन्तु जब हम संघर्ष की वीथियों पर चलते हैं, तब उन्हीं शिक्षकों के सामान्य व्यवहार में उच्चरित वाक्य हमारी समस्याओं का समाधान बन जाते हैं। यही कारण है कि...

राजेन्द्र राजन : हिंदी गीत की साकार प्रतिभा

किसी की भावनाओं का सत्कार करना, प्रेम है। किसी की अनुभूतियों को शब्द में ढलने से पहले ही अक्षरशः समझ लेना, प्रेम है। किसी के अभीष्ट को अपनी आकांक्षाओं से अधिक वरीयता देना, प्रेम है। अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का कौशल, काव्य सृजन की प्रथम अर्हता है। यही कारण है कि प्रेमजन्य समर्पण, मनुष्य को कवि...

नीरज जी का प्रयाण उत्सव

हिंदी भवन में नीरज जी का प्रयाण उत्सव मृत्यु के महोत्सव की मिसाल बन गया। जीवन भर जिजीविषा के आधार पर उत्सव जीनेवाले महाकवि को विदा करने आए लोगों की आँखें नहीं, मन भीग गया। नीरज जी का खिलखिलाता हुआ चेहरा हिंदी भवन सभागार में सुसज्जित भव्य मंच को आलोकित कर रहा था। दाहिनी ओर स्टूल पर उनका एक अन्य...

एक ख़ालिस कवि का जीवन

नीरज जी ने जब भी नज़र उठा कर देखा तो उनकी अदा दिल पर छप गई। उन्होंने अपनी भारी आवाज़ में कुछ आदेश कर दिया तो लगा कि हम धन्य हो गए। नीली लुंगी और जेब वाली बनियान पहने जब वे लोगों को सम्मोहित करते दिखते थे तब महसूस होता था कि कोई फकीर अपनी अल्हड़ मस्ती में हम नए साधकों को चपत लगाते हुए कहा रहा है कि -...

गोपालदास नीरज जी के निधन पर

ये निशा आज फिर नीरज-निशा कहाएगी बस क्षोभ यही; इसमें अब वैसा नूर नहीं ग़ज़लें बाक़ी हैं, गीत बचे हैं अनगिन पर ये आज तुम्हारे स्वर सुख से भरपूर नहीं तुम गीत नहीं रचते थे, जादू करते थे दर्शन की देहरी पर श्रृंगार सजाते थे रस की गगरी के चातक बड़े छबीले थे शब्दों की टोली से कितना बतियाते थे जब आज शाम मैंने...

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