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एक अदद किरदार

‘एक अदद किरदार’ में चिराग़ जैन की उन गद्य रचनाओं का समावेश है, जो डायरी, संस्मरण तथा आत्मकथात्मक शैली में रची जा रही हैं। संभव है इस शीर्षक तले संकलित सभी रचनाएं अंततः चिराग़ जैन की आत्मकथा के रूप में पाठकों को प्राप्त हों।

अनुक्रम

दिल खोलकर…

अपने रोग का संज्ञान होने से लेकर अब तक की यात्रा में जो कुछ जीवन सीखने का अवसर मिला, उसके लिए यह सारा कष्ट बड़ा मोल नहीं है। पहली बार पता लगा कि लोगों की धूर्तता ही नहीं, बल्कि उनकी सहृदयता पर भी एक आवरण चढ़ा होता है, जो ऐसे ही समय में अनावृत होता है। मोर्चे पर खड़े सिपाही को दुनिया बिल्कुल अलग रंग...

दिल की डायरी

दिल में काफी बड़ा घोटाला पकड़ा गया है। जिस विभाग को शरीर में ख़ून वितरित करने का उत्तरदायित्व दिया गया था, वह पिछले 36 वर्ष से कुछ रक्त बचाकर दिल के भीतर फेंकता रहा है। इस भ्रष्टाचार की वजह से दिल का पूरा तंत्र कमज़ोर होता रहा और अब वह अपनी क्षमता का एक-चौथाई काम ही कर पा रहा है। जाँच कमेटी ने उक्त...

वो सुबह कभी न आए!

उस दिन सुबह जब आँख खुली तो पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी। मोबाइल पर आदित्य जी की मृत्यु का समाचार था। तब सोशल मीडिया इतना एक्टिव नहीं था। सो, परस्पर फोन से ही सूचनाएँ मिल पाती थीं। कुछ कवियों को फोन मिला तो पता चला कि दुनिया लुट चुकी है। रात को जो कवि-कुनबा उत्सवों की रौशनी में नहाया हुआ था, अब...

नया धर्म : सेंड टू ऑल

आज मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश में कोई आम आदमी है ही नहीं। हर नागरिक के दुनिया के बड़े से बड़े आदमी से डायरेक्ट कॉन्टेक्ट हैं। और सबको ही कोई कल्पवृक्ष टाइप की सिद्धि प्राप्त है। यही कारण है कि जब उन्हें पैनडेमिक से संबंधित कोई पुख्ता जानकारी चाहिए होती है तो उनके व्हाट्सएप पर सीधे डब्ल्यूएचओ से...

कितनी मुहब्बतें

नोएडा से एक फोन आया। फोन करनेवाला व्यक्ति स्वयं पॉजिटिव होकर अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ घर पर क़ैद था और उसकी पत्नी अस्पताल में कोविड से लड़ रही थी। बीमारी, चिंता, नन्हें बच्चे का लालन-पालन, अर्द्धांगिनी का रोग, अर्थ, अभाव...! उस दिन मन बहुत उदास था। मदद की गुहार बढ़ती जा रही थीं और समाधान के स्रोत...

मददगारों के नाम पाती

सद्भावना युक्त मित्रो! कोरोना की इस महामारी में आपके प्रयास स्तुत्य हैं। आपकी नीयत पर भी कोई संदेह नहीं है, लेकिन किसी को भी मदद भेजने से पहले कृपया निम्न बातों का ध्यान रखें- 1) संकट में फँसे व्यक्ति को केवल वही जानकारी भेजें, जिसकी आपकी टीम ने पिछले 24 घण्टे के भीतर स्वयं पड़ताल की है। 2) सोशल...

मदद की गुहार

मनुष्यो! हमारे साथ लगभग डेढ़-दो सौ युवा अनवरत गिलहरी की भूमिका में इस विपत्ति से लड़ रहे लोगों की सहायता का प्रयास कर रहे हैं। इन्हें न बदले में कोई धन्यवाद चाहिए न तमगा! इनके प्रयासों ने विवशता के रेगिस्तान में खड़े कई प्यासे लोगों का गला तर भी किया है और कुछ तक बस एकाध बून्द ही पहुँचा सके हैं।...

क्या मृत्यु भी प्रतिशोध का अवसर है?

मन की विकलता ने आँखों से नींद छीन ली है। यद्यपि कठिन था, लेकिन मानव की मृत्यु के समाचार सुन-सुनकर भी मैं किसी तरह ख़ुद को थामे हुए था। लेकिन आज मैंने अपनी आँखों से मानवता की मृत्यु का दृश्य देखा। इन चीत्कारों के बीच कुटिल मुस्कान और अट्टहास के वैभत्स्य ने आत्मा को छलनी कर दिया। आह! ये किस समाज में...

अंधेरे में रौशनी का अनुमान

यह समय अगर गुज़र भी गया तो इसके बाद दुनिया वैसी ही होगी जैसा नादिरशाह के आक्रमण के बाद दिल्ली का लालकिला था या जैसा महाभारत के युद्ध के बाद हस्तिनापुर था। जिनके होने से सब कुछ अच्छा लगता था, वो अपने इस दौर में हमसे दूर चले जा रहे हैं। हर आँख नम है, हर आंगन में मातम है; हर श्मशान भभक रहा है। इन सबके...

हम जड़ हो गए हैं

समय का जो चेहरा इस समय यह विश्व देख रहा है, उसकी मनुष्य ने कल्पना भी नहीं की होगी। लेकिन समय, मनुष्यता का जो आचरण इस समय देख रहा है, उसकी समय ने भी कभी कल्पना नहीं की होगी! ऐसा लग रहा है कि कोई हाथ से सब कुछ छीने लिए जा रहा है। जिनके साथ रोज़-रोज़ यात्राएँ कीं, जिनके साथ रातें काली कीं, जिनको दद्दा...

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